बांगड़ूनामा

 
  • मुक्ति के लिए

    ‘ज्यादा बक बक ना कर रे हड्कुआ,तुझे हर बात अपनी मास्टरनी की ही सही लगती है,ये आजकल के लौंडे दो किलास क्या पढ़ लेते हैं खुद को जाने क्या समझने ...
    जुलाई 30, 2017 कमल पंत
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)-2

    अशोक पांडे द्वारा रचित परमौत की प्रेम कथा एक शहर विशेष में घटित हो रहे प्रेम का संग्रह है.लड़कों के किशोरावस्था से युवा वस्था में आने तक की सम्पूर्ण दा...
    जुलाई 30, 2017 ओये बांगड़ू
  • बिरयानी

    ‘मत खाओ,मैं तो खाऊंगा,लजीज,इलाईची की मस्त खुशबू आ रही है अलग से’ चिढाते हुए रत्न बोला. ‘मै चिढने वाला नहीं हूँ,खाने का म...
    जुलाई 30, 2017 कमल पंत
  • कांच और जहर

    सहर करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते हैं इसलिए इनकी कहानियों...
    जुलाई 30, 2017 ओये बांगड़ू
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)-1

    अशोक पांडे द्वारा रचित परमौत की प्रेम कथा एक शहर विशेष में घटित हो रहे प्रेम का संग्रह है.लड़कों के किशोरावस्था से युवा वस्था में आने तक की सम्पूर्ण दा...
    जुलाई 29, 2017 ओये बांगड़ू
  • गाँव का भला

    सभी को बताने की जरूरत नहीं है ,हमारा मसला है आपस में सुलझा लेंगे ‘ नखरे दिखाते हुए नलिनी बोली. ‘हमारा आपस का मसला ? पागल हो गयी हो...
    जुलाई 29, 2017 कमल पंत
  • नाराजगी

    ‘नाराज होकर क्या फायदा ,तू भूखा रहकर शाम तक अनशन करेगा और फिर पापा की डांट खाएगा’ समझाते हुए दीदी ने कहा, ‘खाना खा लो खा...
    जुलाई 28, 2017 कमल पंत
  • बिरादरी की नाक

    ‘उसको इतना ज्यादा चाहा है कि उसके बिना कल्पना भी नहीं कर सकता ‘ बहुत गंभीर होकर बादलों की तरफ देखता हुआ साजन बोला. ‘अच्छ...
    जुलाई 27, 2017 कमल पंत
  • एसे पैदा हुए थे कौरव

    पहाड़ों में एक होता है जागर, जागर मतलब देवताओं के आह्वाहन का तरीका खैर वो ज्यादा इम्पोर्टेंट नहीं है,इम्पोर्टेंट है जागर में डगरिया द्वारा सुनाई जानी व...
    जुलाई 27, 2017 ओये बांगड़ू
  • राष्ट्र का सेवक-प्रेमचन्द

    मुंशी प्रेमचन्द के बारे में कहा जाता है कि वह सच लिख देते थे इसलिए उस समय उतने लोकप्रिय नहीं थे,अपने मरने के बाद उन्होंने जितनी प्रसिद्धी पायी अपने जी...
    जुलाई 25, 2017 ओये बांगड़ू
  • °°प्रार्थना पत्र°°

    डाक्टर कुसुम जोशी की कहानी प्रार्थना पत्र एक अलग तरह का फार्मेट है,चिठी रूप में लिखी एक पूरी कहानी डाक्टर कुसुम जोशी मई की की एक अलसाई सी दोपहर ,गर्मी...
    जुलाई 23, 2017 ओये बांगड़ू
  • लाला,ललाईन और लल्ला -2

    मेरी अच्छी कटने लगी थी, प्राईवेट स्कूल के मास्टर मेरे बाप के पंडिताई के डर से मुझे ढंग से सारा काम करवा देते और पैसा एक एक्स्ट्रा नहीं लेते, उलटा गणित...
    जुलाई 21, 2017 कमल पंत
  • लाला,ललाईन और लल्ला

    किसी के पास खोने को कुछ नहीं होता और कोइ सब कुछ खोना चाहता है, आपको पहली कैटेगरी के मानुष तो बहुत मिलेंगे लेकिन दूसरी कैटेगरी के मानुष किस्मत वालों को...
    जुलाई 19, 2017 कमल पंत
  • *बन्द दरवाजा*

    डाक्टर कुसुम जोशी की लघु कहानियां हमारे आस की कडवी मगर सच्ची  घटनाएँ ही हैं जिन्हें किसी ने महसूस किया और किसी ने नहीं . डाक्टर कुसुम जोशी वो सिर्फ बन...
    जुलाई 14, 2017 ओये बांगड़ू
  • बौड़मसिंह मर गया

    सहर करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते हैं इसलिए इनकी कहानियों...
    जुलाई 11, 2017 ओये बांगड़ू
  • टाईम मशीन लव

    ये आशिक प्रेमी दीवाना जो है इसके पास एक टाईम मशीन है, इसकी लवर हर जन्म में इसके आस पास से निकल जाती है लेकिन इसके करीब नहीं आती. इस बार ये समुद्र के प...
    जुलाई 10, 2017 कमल पंत
  • जाम के नाम

    सहर करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते हैं इसलिए इनकी कहानियों...
    जुलाई 8, 2017 ओये बांगड़ू
  • प्यार की तलाश बाई टाईम मशीन 2

    एक आशिक था ,प्रेमी ,लवर उसके पास थी एक टाईम मशीन ,जिसे लेकर वो अलग जन्मों में अपने और अपने प्यार को देख रहा है. आज गया है वो हिमालय की गुफाओं में रहने...
    जुलाई 1, 2017 कमल पंत
  • प्यार की तलाश बाई टाईम मशीन

    एक लवर था ,आशिक ,प्रेमी उसके पास टाईम मशीन जैसा कुछ था जिससे वह जन्म जन्म में घूमता रहता था. एसे ही एक जन्म में चेक करने को पहुँच गया वो ध्रुव प्रदेशो...
    जून 30, 2017 कमल पंत
  • कहानी अधूरी है ..पूरी करें

    आज से कुछ 50 साल पहले शहरों में आने जाने के लिए गिनती की बसें थी. चार पहिया का इतना हो हल्ला नहीं था और आने जाने की इतनी मारा मारी भी नहीं थी. आफिस मे...
    जून 29, 2017 ओये बांगड़ू
  • कुलच्छनी

    सहर करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते हैं इसलिए इनकी कहानियों...
    जून 22, 2017 ओये बांगड़ू
  • *टाट बाबू**

    डाक्टर कुसुम जोशी की यहाँ कहानी सामाजिक चिंता के कारण पागल हुए लोगों की कहानी है,जो हर समय अपने आस पास के समाज की सोचते हैं डाक्टर कुसुम जोशी कपड़ो की ...
    जून 21, 2017 ओये बांगड़ू
  • धंधेवाली

    ममता रैना की यह कहानी धंधे वाली उस समाजिक सोच पर तंज है जिसके अनुसार कुछ लोग पेशेवर रूप से बुरे ही होते हैं कहानी लेखिका ममता रैना पंडित मोटेराम बड़ी ज...
    जून 17, 2017 ओये बांगड़ू
  • प्यार छुट्टी आया है

    छोटे शहरों की एक बड़ी खासियत ये होती है कि यहाँ अनेकों प्रेम-कहानीयाँ मिल जाती है. सीजन के हिसाब से आज-कल आपको अधिकांश छोटे शहरों में बचपन का लौटा हुआ...
    जून 15, 2017 Girish Lohni
  • *गूलू बन्द*

    डाक्टर कुसुम जोशी की लिखी कहानियों में एक ये गुलुबन्द लालची समाज और लालच के रिश्ते दर्शाती है डाक्टर कुसुम जोशी लाटी जब भी आती , उसे देख मानसी की नारा...
    जून 13, 2017 ओये बांगड़ू
  • अपने नहीं, सगे

    ‘सहर’ करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते ह...
    जून 9, 2017 ओये बांगड़ू
  • खोल दो पिंजरा

    सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ की यह कहानी आजकल के माहौल में फिट है एकदम, ये एक तंज है उस सामाजिक ताने बाने पर जो एक तरफ जानवरों के हकों के लिए लड़ने का दावा कर...
    जून 6, 2017 ओये बांगड़ू
  • हिजड़े

    ममता रैना फिलहाल गाजियाबाद रहती हैं और एक गृहणी हैं . कहानियां में उनकी विशेष रूचि है, हिजड़े एसे ही एक माहौल की कहानी है कहानी लेखिका ममता रैना तेज़ रफ़...
    जून 6, 2017 ओये बांगड़ू
  • *मन ना भये दस बीस*

    डाक्टर कुसुम जोशी की यह कहानी एकतरफा प्यार पर है, बड़ी मासूम सी भोली सी सोच पर एक कहानी का ताना बाना है डाक्टर कुसुम जोशी लाल सिंह एकदम परेशान हो जाता ...
    जून 4, 2017 ओये बांगड़ू
  • अपना प्यारा उत्तराखण्ड

    शंकर दत्त जोशी की यह कविता उत्तराखंड बने पर एक तंज है कवी शंकर दत्त जोशी   उत्तराखण्ड बना तो बहुत अच्छा हुवा । में नेता बनना चाहता था तो नेता...
    जून 4, 2017 ओये बांगड़ू
  • एसी की तैसी

    शंकर दत्त जोशी की यह कविता पहाड़ पर है, पहाड़ क्या कह रहा है सुनो तो जरा कवी शंकर दत्त जोशी ओ रे पर्यावरण वादियो प्रकृति प्रेमियो विचारको कवि-लेखको वैज्...
    जून 3, 2017 ओये बांगड़ू
  • दो तोले की गाय

    शंकर दत्त जोशी जी की यह कविता एक तंज है उस समाज पर जो पत्थर में भगवान तलाशता है कवी शंकर दत्त जोशी पंडित जी के घर खूब झरफर थी । सारे यजमान शान मान से ...
    जून 2, 2017 ओये बांगड़ू
  • किसने कहा गाँव छोड़ा है ??

    शंकर दत्त जोशी जी की यह कविता आपको शायद तुकबन्दी सी लगे , लेकिन शब्दों के बीच में कहीं पर आपको महसूस जरूर होगा कि ये लाइन आपके लिए कही गयी है. बस वही ...
    जून 1, 2017 ओये बांगड़ू
  • दिमागी अपाहिज

    प्रतिमा जायसवाल की लिखी यह कहानी मध्यप्रदेश के माणा गांव में हुई एक सच्ची घटना से प्रेरित है लेखिका प्रतिमा जायसवाल ‘जल्दी चलो…गां...
    मई 29, 2017 ओये बांगड़ू
  • बूबज्यू

    अक्सर पहली और तीसरी पीढ़ी के बीच एक अलग सा लगाव देखने को मिलता है. हमारे समाज में पहली और दुसरी पीढ़ी के बीच उम्र के एक पड़ाव के बाद संवाद टूटना एक आम बा...
    मई 27, 2017 Girish Lohni
  • “सही छाँट “

    इस पूरी कविता से पहले इसके बारे में बताना जरूरी है, शंकर जोशी की लिखी यह कविता उस पहाडी पैटर्न पर आधारित है,जिसके अंतर्गत देवताओं से सवालात किये जाते ...
    मई 26, 2017 ओये बांगड़ू
  • रानी लक्ष्मी बाई या लक्ष्मी ‘बाई’

    दिल्ली के एक सरकारी स्कूल  में पढने वाली वो मासूम सी लड़की जब अचानक इंटर पास करने के बाद आगे की पढाई के लिए घर में सर उठाने लगी तो रिश्तेदारों ने भी मा...
    मई 26, 2017 कमल पंत
  • इश्क-एट-टपरी

    शराब के नशे में धुत्त एक अरसे बाद आज उन्हीं यूनिवर्सिटी की सड़कों में आना हुआ है जहाँ कभी तुम्हारे इश्क के नशे में धुत्त तुम्हारे साथ आना हुआ करता था. ...
    मई 23, 2017 Girish Lohni
  • *कहां ले जाऊँ*

    डाक्टर कुसुम जोशी की पिछली कहानियों से अलग इस कहानी में प्रेम में ठगी का एक हिस्सा आपको पढने को मिलेगा . डाक्टर कुसुम जोशी सवि ने धीरे से कराहते हुए आ...
    मई 22, 2017 ओये बांगड़ू
  • ‘फ्लाइंग स्काउट’

    सीए सरोज साहब ने पांच कहानियों की एक श्रंखला बनाई है. हर कहानी में आपको भरपूर आनन्द आएगा. श्रंखला की चौथी कहानी ‘फ्लाईंग स्काउट’ आपके सामने है. आप पढ़ ...
    मई 19, 2017 ओये बांगड़ू
  • असहज

    सीए सरोज साहब ने पांच कहानियों की एक श्रंखला बनाई है. हर कहानी में आपको भरपूर आनन्द आएगा. श्रंखला की तीसरी कहानी ‘असहज ’ आपके सामने है. आज से लगातार प...
    मई 17, 2017 ओये बांगड़ू
  • ‘बदचलन ’

    सीए सरोज साहब ने पांच कहानियों की एक श्रंखला बनाई है. हर कहानी में आपको भरपूर आनन्द आएगा. श्रंखला की दूसरी कहानी ‘बदचलन ’ आपके सामने है. आज से लगातार ...
    मई 16, 2017 ओये बांगड़ू
  • “हैप्पी मदर्स डे माँ”

    सुरेखा शर्मा (विद्यासागर) हिन्दी सलाहकार सदस्या नीति आयोग, असली मदर्स डे की असली कहानी, सीधे गाँवों के देश भारत से . पड़ोस में रहने वाली काकी के घर हा...
    मई 15, 2017 ओये बांगड़ू
  • बदला

    सीए सरोज साहब ने पांच कहानियों की एक श्रंखला बनाई है. हर कहानी में आपको भरपूर आनन्द आएगा. श्रंखला की पहली कहानी ‘बदला’ आपके सामने ...
    मई 10, 2017 ओये बांगड़ू
  • गाँव का ठैरा

    एक तुकबन्दी! इस तुकबन्दी के सभी पात्र और खुद तुकबन्दी करने वाला भी काल्पनिक है यह कहीं दूसरे ग्रह की बात है अपने उत्तराखंड की नहीं उत्तराखंड से इन घटन...
    मई 7, 2017 ओये बांगड़ू
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