बांगड़ूनामा

 
  • इन ढलानों पर वसंत आएगा – मंगलेश डबराल

      इन ढलानों पर वसंत आएगा हमारी स्मृति में ठंड से मरी हुई इच्छाओं को फिर से जीवित करता धीमे-धीमे धुँधुवाता खाली कोटरों में घाटी की घास फैलती र...
    फरवरी 10, 2019 ओये बांगड़ू
  • लार्ड मैकाले तेरा मुँह काला हो – कमल जीत चौधरी

      बच्चे ! मैं उस दौर का बच्चा था जो माँ से पूछते थे पिता की छुट्टी कब खत्म होगी बच्चे ! तुम उस दौर के बच्चे हो जो माँ से पूछते हैं पापा किस द...
    जनवरी 21, 2019 ओये बांगड़ू
  • इतने भले नहीं बन जाना: वीरेन डंगवाल

    इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी कुव्वत सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया नहीं न किसी को कुछ ...
    जनवरी 19, 2019 ओये बांगड़ू
  • गाँव के रास्ते

    गांव के कच्चे रास्तों पर जवान जानवर भाग रहे हैं. जिनके पीछे बूढ़े भागते हैं. बूढ़ों के पसीने और जानवरों के दूध से बना घी खाकर दूर शहरों में जवानों के बच...
    जनवरी 16, 2019 Girish Lohni
  • कैफ़ी आज़मी, जिनका लिखा बार बार याद आया

    उर्दू के एक अजीम शायर कैफ़ी आज़मी एक ऐसा नाम रहा जिनका लिखा हर अंदाज़ में लोगों को पसंद आया.फिर वह चाहे शेरो शायरी हो,नज्में या बॉलीवुड में यादगार बन जान...
    जनवरी 15, 2019 ओये बांगड़ू
  • किताबें: सफ़दर हाशमी

    किताबें करती हैं बातें बीते जमानों की दुनिया की, इंसानों की आज की कल की एक-एक पल की। खुशियों की, गमों की फूलों की, बमों की जीत की, हार की प्यार की, मा...
    जनवरी 11, 2019 ओये बांगड़ू
  • पढ़ना-लिखना सीखो

    किसी जमाने में साक्षरता अभियान चला था तब हमारे प्यारे दूरदर्शन पर इस गाने को बड़े सुर में गाया जाता था.सफदर हाशमी की लिखी ये कविता नुक्कड़ नाटकों और आंद...
    जनवरी 4, 2019 ओये बांगड़ू
  • पहचान- अमृता प्रीतम

    तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए–   एक गुफा हुआ क...
    जनवरी 3, 2019 ओये बांगड़ू
  • इस उत्तरायणी सुनिए सुर में काले कव्वा

    बचपन से छतों में चीख चीख कर कव्वों को बुलाया होगा आपने , काले कव्वा काले घुघते की माला खा ले, ये हमने इतना बेसुरा होकर गाया है कि कई बार कव्वों ने आकर...
    जनवरी 2, 2019 ओये बांगड़ू
  • टूटी हुई बिखरी हुई- शमशेर बहादुर सिंह

    टूटी हुई बिखरी हुई चाय की दली हुई पांव के नीचे पत्तियां मेरी कविता बाल झड़े हुए, मैल से रूखे, गिरे हुए गर्दन से फिर भी चिपके ….कुछ ऐसी मेरी ...
    दिसंबर 31, 2018 ओये बांगड़ू
  • बाबा बनने में फायदा है…

    बचपन से उसे बता दिया गया था कि बड़ा होकर उसने सरकारी नौकरी करनी है. देव सिंह नाम था उसका बचपन से ही बहुत बड़ा बेवकूफ, तीसरी क्लास से लेकर बारहवीं तक उसन...
    दिसंबर 29, 2018 ओये बांगड़ू
  • कहीं और मिला कर मुझसे -साहिर लुधियानवी

    कहानी और कविताओं में इश्क,मुहब्बत ,प्यार ऐसा टॉपिक है जिसे हर किसी ने कभी न कभी अपनी ज़िन्दगी में उतारा होता है. ऐसे में अपने पसंदीदा लेखकों की इश्क पर...
    दिसंबर 27, 2018 ओये बांगड़ू
  • जन्म

    अंगेठी के चूल्हे पर मैने शब्दों को रख दिया उबलने को   पतीला अब गर्म हो चुका आग की धाह से पानी खौलने लगा जिससे निकलते बुलबुले कुछ गढ़ने को आतु...
    दिसंबर 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • सुनो कहानी : जंगल में इश्कबाज़ी

    कहानी पढ़ी तो आपने खूब होंगी लेकिन जंगल में जानवरों की खाल पहने लोगों के इश्क की दिलचस्प कहानी यहाँ सुनिए-  http://www.oyebangdu.com/wp-content/uploads...
    दिसंबर 23, 2018 ओये बांगड़ू
  • अब लगन लगी किह करिए- बुल्ले शाह

    बाबा बुल्ले शाह दा नाम पंजाबी सूफ़ी काव्य दे आसमान उते एक चमकते सितारे वर्गा हैं।बॉलीवुड गीता विच आए बुल्ले शाह दे लिखे लव्ज़ हर जुबान उते चढ़ कर बोले. उ...
    दिसंबर 19, 2018 ओये बांगड़ू
  • आज कोए राज नहीं न्यायकारी – मुकेश यादव

    आज कोए राज नहीं न्यायकारी जनता फिर री मारी मारी झूठा ढोंग रचा राख्या, न्यारे-न्यारे पाड़ै, फूट का फायदा ठा राख्या   शहीदां नै दी थी कुर्बानी,...
    दिसंबर 11, 2018 ओये बांगड़ू
  • बाजार

    एक मान्यता, एक दिखावा जहाँ होड़ लगी नीचा , ऊँचा दिखाने की, और वहाँ दूर जंगल में.  शव काटता एक आदमी अपनी मान्यताओं से मजबूर उसके सपने बादलों में दूर जाक...
    दिसंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • पिता

    मेरी धमनियों में दौड़ता रक्त और तुम्हारी रिक्तता महसूस करती मैं, चेहरे की रंगत का तुमसा होना सुकून भर देता है मुझमें मैं हूँ पर तुमसी दिखती तो हूँ खैर ...
    दिसंबर 4, 2018 ओये बांगड़ू
  • आइसक्रीम

    बस एक कोन वाली आईस्क्रीम खानी थी उसे, लेकिन साथ खड़े महाशय बार बार मना कर रहे थे, आखिर सर्दियां शुरू हो गयी थी , जुकाम लगा था और मोहतरमा जिद पर अड़ी थी ...
    नवंबर 30, 2018 ओये बांगड़ू
  • हरिवंश राय बच्चन – जीवन की आपाधापी में

    शब्दों के जरिए दुनियां को जीवन के कई रहस्य समझाने वाले महान लेखक हरिवंश राय बच्चन का आज जन्मदिन है. आजादी के बाद हिंदी साहित्य को एक अहम जगह दिलाने वा...
    नवंबर 27, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक कहानी- देवता लग जाना

    पहाड़ में एक प्रथा है । किसी को देवता “लग” जाता है और वह निदान के लिए ‘पुछ्यारे’ /’वाक्किये&#821...
    नवंबर 23, 2018 ओये बांगड़ू
  • आरक्षण वाली शोले

    वीरू – ये दोस्ती हम नही तोडेंगे ! जय –भक्क दलित कहीं के!   जय – मौसी बसंती को बोल हाँ कर दे वर्ना कुद जाऊँगा फान जाऊँगा !...
    नवंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू
  • इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी – राजेश दलाल

    इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी झुण्ड के झुण्ड जां जय जय करते लाहौर जेळ तीर्थ होगी   दसौं दिशा लहरागी लपटें भट्ठी होगी लाहौर मैं भार...
    नवंबर 15, 2018 ओये बांगड़ू
  • बचपन की यादें -कमलकांत सक्सेना

    बचपन की यादें लिखती है, रोज-रोज नया इतिहास! ज्यों-ज्यों तन साया बढ़ता, बढ़ती जाती उम्र की प्यास!   घुटरूं-घुटरूं चलना, गिरना, उठना, फिर बढ़ना...
    नवंबर 14, 2018 ओये बांगड़ू
  • साची बात कहण म्हं सखी होया करै तकरार -बाजे भगत

    साची बात कहण म्हं सखी होया करै तकरार दगाबाज बेरहम बहन ना मरदां का इतवार   रंगी थी सती प्रेम के रंग म्हं, साथ री बिपत रूप के जंग म्हं दमयन्ती ...
    नवंबर 10, 2018 ओये बांगड़ू
  • डरपोक मित्रमंडली और चमत्कारिक मन्त्र

    बचपन में कुछ बच्चे घर से बाहर निकलने में घबराते थे . सुनसान रात उस पर झींगुर की आवाज टर्र टर्र,सन सन चलती सर्द हवा . कभी कभी आवाज के साथ चलने वाले झों...
    नवंबर 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • परदेसी बेटा

    इस दीवाली मेरा घरौंदा सूना सा होगा मिट्टी के दीयरी (दीये) का उजाला घुँधलाएगा ओसारे की चौखट राह तकेगा आने का  अब बेटा परेदेशी वापस कैसे घर आयेगा &n...
    नवंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली : राजेश दलाल

    हरियाणा के रोहतक म्ह रहण वाले राजेश दलाल की लिखी “हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली” कविता प्यार पर चलती खाप पंचयात की तलव...
    नवंबर 2, 2018 ओये बांगड़ू
  • भारत का यह रेशमी नगर – रामधारी सिंह दिनकर

    भारत धूलों से भरा, आंसुओं से गीला, भारत अब भी व्याकुल विपत्ति के घेरे में. दिल्ली में तो है खूब ज्योति की चहल-पहल, पर, भटक रहा है सारा देश अँधेरे में....
    अक्टूबर 30, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक प्रेम कविता – प्रेत आएगा : बद्री नारायण

    किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा   चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुराएगा जुआरी प्रेमपत्र ही दांव लगाएगा ऋषि आ...
    अक्टूबर 28, 2018 ओये बांगड़ू
  • राजी खुशी की मत बूझै – रामफल सिंह ‘जख्मी’

      राजी खुशी की मत बूझै, बन्द कर दे जिक्र चलाणा हे दिन तै पहल्यां रोट बांध कै, पड़ै चौक म्हं जाणा हे   देखूं बाट बटेऊ ज्यूं, कोये इसा...
    अक्टूबर 26, 2018 ओये बांगड़ू
  • किरन जीत गइल -रमेशचन्द्र झा

    बिहार के फुलवरिया गाँव में जन्में रमेशचन्द्र झा  भारतीय स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय क्रांतिकारी रहिल . जो साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय भूमिका ...
    अक्टूबर 25, 2018 ओये बांगड़ू
  • वाल्मीकि उवाच- योगेन्द्र दत्त शर्मा

    अभिशाप मेरे साथ यह कैसा हुड़ा, तमसा नदी! फिर एक जोड़ा क्रौंच का बिछुड़ा, घिरा तम-सा, नदी! यह क्या घटा फिर दृष्टियों के सामने कोई न आया इस प्रलय को थाम...
    अक्टूबर 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • हर उजियारे पर भारी है, एक घड़ी की परछाई- चिराग जैन

    उत्सव की आँखें भीगी हैं एक घड़ी विपदा लाई हर उजियारे पर भारी है एक घड़ी की परछाई   कैसे वर मांगे कैकयी ने, सिंहासन से राम छिने काया से जीवन छीन...
    अक्टूबर 20, 2018 ओये बांगड़ू
  • सिगरेट – अमृता प्रीतम

    यह आग की बात है तूने यह बात सुनाई है यह ज़िंदगी की वो ही सिगरेट है जो तूने कभी सुलगाई थी   चिंगारी तूने दे थी यह दिल सदा जलता रहा वक़्त कलम प...
    अक्टूबर 16, 2018 ओये बांगड़ू
  • सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

    इंकलाबी कवि अवतार सिंह संधू उर्फ पाश भले ही पंजाबी के कवि थे लेकिन हिंदी में उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी. “पाश” की कलम से डरने वाले खालिस्तानी उग्रवादि...
    अक्टूबर 11, 2018 ओये बांगड़ू
  • मुनस्यारी- हमारे उसैन बोल्ट हो जाने के किस्से

    इस कहानी के लेखक लवराज वैसे तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत लेकिन लिखने का भी शौक रखते हैं. आज यह अपनी लेखनी के जरिए उत्तराखंड के छोटे से पर बेहद...
    अक्टूबर 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • मेहनत का सार- विजयदान देथा

    ‘बिज्जी’ के नाम से मशहूर पद्मश्री विजयदान देथा की कहानियों की गूंज भाषाओं, संस्कृतियों और समय के पार पहुंची. राजस्थान में रहते हुए...
    अक्टूबर 5, 2018 ओये बांगड़ू
  • कौ ठगवा नगरिया लूटल हो- कबीरदास

    कबीरदास को भोजपुरी में नहीं पढ़ल तो समझों कछु नाहिं पढ़ें. अब तक कबीरदास दोहें हिंदी और संस्कृति में तो खुबे पढ़े होंगें. लेकिन भोजपुरी में कबीरदास का लि...
    अक्टूबर 4, 2018 ओये बांगड़ू
  • बापू – रामधारी सिंह दिनकर

    रामधारी सिंह दिनकर की कविताएँ ‘बापू’ की बातों की ही तरह बीतते वक़्त के साथ और प्रासंगिक होती जा रही हैं. दिनकर ने बापू और उनके किए बलिदानों को अपने शब्...
    अक्टूबर 2, 2018 ओये बांगड़ू
  • उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया- हरिचंद

    अन्न्देवता यानी किसान के बद से बदतर होते हालात पै है लेखक ‘हरिचंद’ की ये कविता -उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया &nb...
    अक्टूबर 1, 2018 ओये बांगड़ू
  • मैं समोसा

    डा.कुसुम जोशी सामन्य तौर पर ओएबांगडू पर अपनी कहानियों को लेकर चर्चित रही हैं,समोसे पर उनकी यह कहानी मैं समोसा डाक्टर कुसुम जोशी मैं समोसा जिसके मुख चढ़...
    सितंबर 26, 2018 ओये बांगड़ू
  • अट्रेक्शन की कहानी

    बुढ़ापे में आकर किसी रोमांटिक कहानी के आधे पेज सत्य और आधे काल्पनिक लिखने से अच्छा था कि समय रहते कहानी को एक दिशा दे दी जाए। (यह लाईन इस कहानी के हीरो...
    सितंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू
  • मौत से ठन गई- अटल बिहारी वाजपेयी

    भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जितने एक राजनेता के रूप में जनता के पसंदीदा रहें उतना ही लोगों ने उन्हें एक कवि के रूप में पसंद किया. ...
    अगस्त 16, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक पंद्रह अगस्त ऐसा भी

    पंद्रह अगस्त से  एक रात पहले सारे सिपाही बैरक में मोती चूर के लड्डू मलने में लगे थे. शहर भर के स्कूलों में फौजी कैम्प से ही मिठाई जानी थी. शहर भर के क...
    अगस्त 15, 2018 ओये बांगड़ू
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