बांगड़ूनामा

 
  • मेरे देश की आंखें: अज्ञेय

    नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं पुते गालों के ऊपर नकली भवों के नीचे छाया प्यार के छलावे बिछाती मुकुर से उठाई हुई मुस्कान मुस्कुराती ये आंखें नहीं,...
    अगस्त 15, 2018 ओये बांगड़ू
  • नज़रों की बेरोज़गारी

    भूटान के एक खुबसूरत शहर में घुमते हुए गैर ज़िम्मेदार आज़ादी और खुबसूरत लड़की से मुलाक़ात का किस्सा बता रहे है पिथौरागढ में रहने वाले अभिजीत. अभिजीत नवाबों...
    अगस्त 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • वो बरसात की रात 

    आगरा की रहने वाली दीप्ति शर्मा अपने शब्दों को ताजमहल सी खुबसूरत रचनाओं में पिरोने वाली फ्रीलान्स राइटर हैं. आज दीप्ती ने ओएबांगड़ू को बरसात के इस मौसम...
    जुलाई 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • कारवाँ गुज़र गया- गोपाल दस नीरज

    ‘‘अगर दुनिया से रुखसती के वक्त आपके गीत और कविताएं लोगों की जबान और दिल में हों तो यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी. इसकी ख्वाहिश हर फनकार को होती है.” प...
    जुलाई 20, 2018 ओये बांगड़ू
  • हमारे कृषक- रामधारी सिंह दिनकर

    जन जन से जुड़ने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सालों पहले थी.दिनकर की लिखी ‘हमारे कृषक’ आज भी किसानों क...
    जुलाई 13, 2018 ओये बांगड़ू
  • बू – सआदत हसन मंटो (पार्ट -2)

    जो बाते आज भी समाज की दिखावटी लाज शर्म के कारण कही दबी छिपी सी रहती है उन्हें मंटो ने सालों पहले बेहद बेबाकी से लिखा. फिर वह चाहे औरत और मर्द के रिश्त...
    जुलाई 12, 2018 ओये बांगड़ू
  • बू – सआदत हसन मंटो

    शोहरत की तरह ही बदनामी कमाने वाले सआदत  हसन मंटों ने भले ही ताउम्र अपने लिखने के लिए कोर्ट के चक्कर और समाज में बुराई हासिल  की  हो लेकिन आज इतने सालो...
    जुलाई 9, 2018 ओये बांगड़ू
  • प्यार से प्यारी एक प्रेम कहानी

    सभी लोगों ने आदी की तरफ बडी नफरत की निगाह से देखा मानो आदी उस बारात का सबसे बडा  दुश्मन था. पर बचपन से ही अलहड जिंदगी गुजारता आया था आदी. ना किसी का ड...
    मई 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • अनसुनी करके – रविंद्रनाथ टैगोर

    भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखने वाले महान लेखक और चित्रकार रविंद्रनाथ टैगोर का आज जन्मदिन हैं. टैगोर ने अपनी पहली कविता 8 साल की छोटी आयु में ह...
    मई 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • विकास-विकास का नारा देता मैं

    लेखक -सुंदरम सुन्दरम्, कच्ची उम्र में समाज से जुड़ने की कोशिश करता एक युवक है जिसको देखकर आप कहेंगे कि बच्चा ही है.लेकिन लेखनी में दम है नहीं देखने म...
    अप्रैल 28, 2018 ओये बांगड़ू
  • मैं हिंदुस्तान लिखूँ,पर तुम रेपिस्तान समझना !

    लेखिका-रोशी सिंह मैं हिंदुस्तान लिखूँ पर तुम रेपिस्तान समझना ! मैं जन्म लूँ तुम एक टक तकना थोड़ा इंतज़ार करना तब बलात्कार करना…. मैं हिंद...
    अप्रैल 12, 2018 ओये बांगड़ू
  • काले तिल वाली लड़की

    कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लडकियों ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल आनाज नही होता ये पूरी दु...
    अप्रैल 10, 2018 ओये बांगड़ू
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 8

    कलौनी गुरु सरिता पांडे, जिनका औरकूट नाम सरिता पांडे जोशी था. जोशी मासाप की सबसे बड़ी बेटी है और बडाबे के जूनियर हाईस्कूल में फिलहाल सरकारी टीचर है. कह...
    अप्रैल 10, 2018 Girish Lohni
  • वो निश्छल हंसी

    सर्दियों की बारिश थी वो,जब ठंड में सिकुड़ते हुए उसे करोल बाग़ के मेट्रो पीलर के नीचे खड़े देखा था,स्वेटर भीग चुकी थी,और होंठ एक दुसरे से मिलते बिछुड़ते रह...
    अप्रैल 8, 2018 कमल पंत
  • खून सनी कुल्हाड़ी

    बहुत पहले लोग कहा करते थे कि उसके घर देर है अंधेर नही, कोर्ट के मामले में भी ऐसा ही कहा जाने लगा, कहानी काल्पनिक है लेकिन कहानी का आधार एकदम सच्चा। एक...
    अप्रैल 7, 2018 कमल पंत
  • ओछा और अच्छा

    ‘दर्दनाक हो जाता है जब वो बांस के पतले से डंडे से मेरे बगल में बैठी उस मासूम सी लडकी के हाथ में खींच कर ‘स्वाट’ की आवाज ...
    अप्रैल 2, 2018 कमल पंत
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 7

    उर्स ए पिथौरागढ़ मोह्ब्ब्त की वह दास्तान है जो एक शहर मे धीरे धीरे घट रही थी ये कहानी मे अब तक क्या क्या हुआ ये अगर आपको जानना है तो इस लिंक पर क्लिक क...
    मार्च 27, 2018 Girish Lohni
  • झन्न गुरु के कारनामे -4

    झन्न गुरु झन्नाटेदार थप्पड़ मार देने वाले उस महान विरासत के आखरी किरदार थे जिन्हें अपने जीवन में लगता था कि थप्पड़ जड़ देना ही काम का हो जाना है. पिछले त...
    मार्च 17, 2018 कमल पंत
  • अधूरी कविताएं

    अधूरी कविताएं अब तक मेरी लिखी कविताओं का निजी संकलन है। दुनिया में सबसे खतरनाक काम कविता सुनाना है क्योंकि सामने वाले को बोर करने के लिये भी आत्मविश्...
    मार्च 9, 2018 Girish Lohni
  • तुम कौन हो?

    सातवीं में पढ़ने वाला सिब्बू सरकार बड़ा होकर उपन्यासकार बनना चाहता है. कच्ची उमर में शब्दों का बड़ा पक्का है सिब्बू सरकार. गाता ही नहीं शानदार लिखता...
    मार्च 9, 2018 ओये बांगड़ू
  • प्रतीक्षा

    डा.कुसुम जोशी गाजियाबाद (उ.प्र.). डाक्टर कुसुम जोशी होलाष्टक के साथ ही पहाड़ों के गांव गांव चीर बंधी और फाग उठने लगे , घर घर से ढोल मंजीरा,हारमोनियम औ...
    फरवरी 25, 2018 ओये बांगड़ू
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)14

    चाभी के नब्बू डीयर के पास रह जाने के दुर्योग के लिए हरुवा के भन्चकत्व को ज़िम्मेदार बताने के उपरान्त परमौत ने रात के काफ़ी हो जाने और नब्बू डीयर के घर ज...
    फरवरी 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • झन्न गुरु के कारनामे -3

    झन्न गुरु अपने झन्नाटेदार थप्पड़ों के लिए तो प्रसिद्ध थे ही साथ ही अपने उग्र क्रांतीकारी विचारों के लिए भी वह खूब जाने जाते थे.मोहल्ले के मोहल्ले (अपने...
    फरवरी 23, 2018 कमल पंत
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 6

    इंटर की लौंडाई हवा अगले दिन पूरी सावधानी बरतते हुए प्रदीप ने अपने पहले ट्यूशन से दुसरे ट्यूशन की दौड़ कुमौड़ से रोडवेज को जाने वाली सीधी सड़क से तय की. ह...
    फरवरी 21, 2018 Girish Lohni
  • झन्न गुरु के कारनामे -2

    झन्न गुरु थोड़ा दुनिया से अलग थे, एसा उनके पैदा होते ही चिन्ह देखने वाले ज्योतिषी ने कह दिया था,उनके पैदा होने के ग्यारहवें दिन उनका नाम रखा गया जनार्द...
    फरवरी 17, 2018 कमल पंत
  • झन्न गुरु के कारनामे -1

    झन्नाटेदार थप्पड़ के स्वामी थे गुरु झन्न जी, झन्न उनका नाम झन्नाटेदार के शुरुवाती दो शब्दों के कारण ही शायद पड़ा हो. एक अलग ही रुआब था उनका,5 फुट की हाई...
    फरवरी 9, 2018 कमल पंत
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)13

    हरुवा भन्चक के एक स्टेटमेंट ने हमें सन्नाटे में डाल दिया था. इतनी आसान भाषा में इसके पहले मानव इतिहास में आशिकों को शायद ही कभी वर्गीकृत किया गया होगा...
    फरवरी 9, 2018 ओये बांगड़ू
  • उर्स ए पिथौरागढ़ भाग 5

    हरकवा मासाप शाम के सात बजे घर पहुचते ही प्रदीप किताब की पौलोथीन पटकता हुआ बोला नी जाउंगा आज से में हरकवा मासाब के यहाँ इंग्लिश पढ़ने. पढ़ाता लिखाता है न...
    फरवरी 5, 2018 Girish Lohni
  • उर्स ए पिथौरागढ़ भाग 4

    बिन घन्टे का घन्टाकरण अगला दिन प्रदीप के लिए उतना ही सूखा रहा जितना की और कोई. एकबार महर्षि विद्या मंदिर के पीछे से निकलते हुए उसे शरीर में जरुर झुर-झ...
    जनवरी 31, 2018 Girish Lohni
  • उर्स ए पिथौरागढ़ भाग 3

    सिन्ना और सिंगाण इससे पहले की प्रदीप कुछ समझ पाता. उसने खुद को महर्षि विद्या मंदिर के पिछले हिस्से में गिरा पाया और एक सच्चे पहाडी की तरह उसके मुह से ...
    जनवरी 21, 2018 Girish Lohni
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ भाग 2

    मुलाकात का पंच  वाकिया कुमौड़ से आरा मशीन को जाने वाले पतले पगडंडी वाले रास्ते का हैं. इस पूरे रास्ते में तब आज की तरह मकानों की कतार के बजाय कुल मिलाक...
    जनवरी 6, 2018 Girish Lohni
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़

    गैंग्स ऑफ टैक्सी ये कहानी भारत के छोटे से राज्य उत्तराखंड के पिथौरागढ कस्बे की है. कहानी उस दौर की है जब पिथौरागढ़ उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा हुआ करत...
    दिसंबर 19, 2017 Girish Lohni
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)12

    लाईट जाते ही नब्बू डीयर बोला – “लाईट चली गयी”. अँधेरे में आसपास से गुज़र रहे तीन-चार त्रिकालदर्शी महात्माओं ने भी कहा &am...
    दिसंबर 19, 2017 ओये बांगड़ू
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)-11

    एक होते थे हरुवा भन्चक. पहाड़ की शैली में कहा जाए तो इस कहानी में उनका प्रवेश करना अब मस्ट हो गया था. हरुवा भन्चक का असली नाम हरीश कुछ था लेकिन यह ख़िता...
    दिसंबर 15, 2017 ओये बांगड़ू
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)-10

    चाय-कम-चैंटू-सेंटर में लफंडर छोकरों द्वारा दी गयी अप्रत्याशित चुनौती से आहत और पराजित हुआ परमौत फैसला नहीं कर पा रहा था कि क्लास जाए या नहीं. प्रत्यक्...
    दिसंबर 14, 2017 ओये बांगड़ू
  • दूधबोली

    पुखराज और निमी जिन्दगी के 25 वें पडाव पर पहुंचे थे,लम्बे समय बाद दोनों की मुलाकात हुई एक दिन एक बड़े शहर के बड़े से काफी होम में , निमी अपने दोस्तों के ...
    दिसंबर 13, 2017 कमल पंत
  • कल्याणी आमा

    अब जाकर मरी कल्याणी आमा,पूरा घर आज उसका शोक मना रहा था,पंडित ने उसकी जाती गोत्र पूछा तो याद ही नहीं आया कि उसका क्या गोत्र जात थी. खैर कल्याणी नाम था ...
    दिसंबर 12, 2017 कमल पंत
  • एक कहानी चिड़िया की

    एक सपना मैंने भी सजाया, आँखों में वो जुनून भर आया। उड़ान आसमान को छूने की थी कि तभी एक झोंका सा आया एक ख़ुशी थी कि संसार में आउंगी, पर नहीं पता था कि ...
    दिसंबर 9, 2017 ओये बांगड़ू
  • भदेली में कैमरा

    ‘रख दो इन कैमरों को दिन भर क्या कंधे पर चढ़ाए घुमते रहते हो,विशवास को देखो कितना अच्छा काम करता है तुम्हारी तरह वो भी कैमरा ही चलाता है लेकिन दिन भर क...
    दिसंबर 9, 2017 कमल पंत
  • दबी जुबानें

    ‘अब क्या हुआ ? ये अचानक से मूड क्यों बदल गया . इतने टाईम बाद मिला हूँ कम से कम मिलकर ढंग से हाई हेलो कर लो.’ कृष्णा और विजय बहुत अ...
    दिसंबर 5, 2017 ओये बांगड़ू
  • आखिरी शाम

    शाम के कुछ ६ बजे होंगे, सूरज ढले १५ मिनट बीत चुके थे, सिमलगैर मार्किट में युवओं की चहल पहल अभी उस दिन के लिए चरम सीमा पर थी. ये साल का वो समय था जब लो...
    दिसंबर 3, 2017 ओये बांगड़ू
  • मिलन

    विधाता ने इत्तेफाक से दोनों को मिलवाया था,न कालोनी एक , न शहर एक , न राज्य न देश . एक बस ये देश था जो दोनों खुद का अपना कह सकते थे. दोनों में कोइ भी स...
    नवंबर 18, 2017 कमल पंत
  • मैं हूँ एक इण्डियन बेचलर

    मैं हूँ एक इण्डियन बेचलर तलाश मुझे है एक बीवी की      दिखने में हो जो हाट एंड सेक्सी      संस्कारों में हो जो हो खरी खरी      बंद कमरे में हो जो जंगली...
    अक्टूबर 26, 2017 Girish Lohni
  • द्वंद

    डाक्टर कुसुम जोशी पन्द्रह साल से जेल की कोठरी में बंद उदय सिंह की आत्मा आज तक बैचेन है, वो समझ नही पाता कि मासूम और निर्दोष पड़ोस में रहने वाली उस लड़की...
    अक्टूबर 14, 2017 ओये बांगड़ू
  • माता की चौकी

    जय माता दी, जय माता दी , भजन मण्डली ने जयकारे लगाने शुरू किये तो जनता ने भी पूरे जोश से सुर में सुर मिलाया | पूरा मुहल्ला ही उमड़ कर आ गया था उस पंडाल ...
    अक्टूबर 6, 2017 ओये बांगड़ू
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