बांगड़ूनामा

 
  • डरपोक मित्रमंडली और चमत्कारिक मन्त्र

    बचपन में कुछ बच्चे घर से बाहर निकलने में घबराते थे . सुनसान रात उस पर झींगुर की आवाज टर्र टर्र,सन सन चलती सर्द हवा . कभी कभी आवाज के साथ चलने वाले झों...
    नवंबर 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • परदेसी बेटा

    इस दीवाली मेरा घरौंदा सूना सा होगा मिट्टी के दीयरी (दीये) का उजाला घुँधलाएगा ओसारे की चौखट राह तकेगा आने का  अब बेटा परेदेशी वापस कैसे घर आयेगा &n...
    नवंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली : राजेश दलाल

    हरियाणा के रोहतक म्ह रहण वाले राजेश दलाल की लिखी “हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली” कविता प्यार पर चलती खाप पंचयात की तलव...
    नवंबर 2, 2018 ओये बांगड़ू
  • भारत का यह रेशमी नगर – रामधारी सिंह दिनकर

    भारत धूलों से भरा, आंसुओं से गीला, भारत अब भी व्याकुल विपत्ति के घेरे में. दिल्ली में तो है खूब ज्योति की चहल-पहल, पर, भटक रहा है सारा देश अँधेरे में....
    अक्टूबर 30, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक प्रेम कविता – प्रेत आएगा : बद्री नारायण

    किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा   चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुराएगा जुआरी प्रेमपत्र ही दांव लगाएगा ऋषि आ...
    अक्टूबर 28, 2018 ओये बांगड़ू
  • राजी खुशी की मत बूझै – रामफल सिंह ‘जख्मी’

      राजी खुशी की मत बूझै, बन्द कर दे जिक्र चलाणा हे दिन तै पहल्यां रोट बांध कै, पड़ै चौक म्हं जाणा हे   देखूं बाट बटेऊ ज्यूं, कोये इसा...
    अक्टूबर 26, 2018 ओये बांगड़ू
  • किरन जीत गइल -रमेशचन्द्र झा

    बिहार के फुलवरिया गाँव में जन्में रमेशचन्द्र झा  भारतीय स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय क्रांतिकारी रहिल . जो साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय भूमिका ...
    अक्टूबर 25, 2018 ओये बांगड़ू
  • वाल्मीकि उवाच- योगेन्द्र दत्त शर्मा

    अभिशाप मेरे साथ यह कैसा हुड़ा, तमसा नदी! फिर एक जोड़ा क्रौंच का बिछुड़ा, घिरा तम-सा, नदी! यह क्या घटा फिर दृष्टियों के सामने कोई न आया इस प्रलय को थाम...
    अक्टूबर 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • हर उजियारे पर भारी है, एक घड़ी की परछाई- चिराग जैन

    उत्सव की आँखें भीगी हैं एक घड़ी विपदा लाई हर उजियारे पर भारी है एक घड़ी की परछाई   कैसे वर मांगे कैकयी ने, सिंहासन से राम छिने काया से जीवन छीन...
    अक्टूबर 20, 2018 ओये बांगड़ू
  • सिगरेट – अमृता प्रीतम

    यह आग की बात है तूने यह बात सुनाई है यह ज़िंदगी की वो ही सिगरेट है जो तूने कभी सुलगाई थी   चिंगारी तूने दे थी यह दिल सदा जलता रहा वक़्त कलम प...
    अक्टूबर 16, 2018 ओये बांगड़ू
  • सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

    इंकलाबी कवि अवतार सिंह संधू उर्फ पाश भले ही पंजाबी के कवि थे लेकिन हिंदी में उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी. “पाश” की कलम से डरने वाले खालिस्तानी उग्रवादि...
    अक्टूबर 11, 2018 ओये बांगड़ू
  • मुनस्यारी- हमारे उसैन बोल्ट हो जाने के किस्से

    इस कहानी के लेखक लवराज वैसे तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत लेकिन लिखने का भी शौक रखते हैं. आज यह अपनी लेखनी के जरिए उत्तराखंड के छोटे से पर बेहद...
    अक्टूबर 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • मेहनत का सार- विजयदान देथा

    ‘बिज्जी’ के नाम से मशहूर पद्मश्री विजयदान देथा की कहानियों की गूंज भाषाओं, संस्कृतियों और समय के पार पहुंची. राजस्थान में रहते हुए...
    अक्टूबर 5, 2018 ओये बांगड़ू
  • कौ ठगवा नगरिया लूटल हो- कबीरदास

    कबीरदास को भोजपुरी में नहीं पढ़ल तो समझों कछु नाहिं पढ़ें. अब तक कबीरदास दोहें हिंदी और संस्कृति में तो खुबे पढ़े होंगें. लेकिन भोजपुरी में कबीरदास का लि...
    अक्टूबर 4, 2018 ओये बांगड़ू
  • बापू – रामधारी सिंह दिनकर

    रामधारी सिंह दिनकर की कविताएँ ‘बापू’ की बातों की ही तरह बीतते वक़्त के साथ और प्रासंगिक होती जा रही हैं. दिनकर ने बापू और उनके किए बलिदानों को अपने शब्...
    अक्टूबर 2, 2018 ओये बांगड़ू
  • उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया- हरिचंद

    अन्न्देवता यानी किसान के बद से बदतर होते हालात पै है लेखक ‘हरिचंद’ की ये कविता -उल्टी गंगा पहाड़ चढा दी इसा नजारा देख लिया &nb...
    अक्टूबर 1, 2018 ओये बांगड़ू
  • मैं समोसा

    डा.कुसुम जोशी सामन्य तौर पर ओएबांगडू पर अपनी कहानियों को लेकर चर्चित रही हैं,समोसे पर उनकी यह कहानी मैं समोसा डाक्टर कुसुम जोशी मैं समोसा जिसके मुख चढ़...
    सितंबर 26, 2018 ओये बांगड़ू
  • अट्रेक्शन की कहानी

    बुढ़ापे में आकर किसी रोमांटिक कहानी के आधे पेज सत्य और आधे काल्पनिक लिखने से अच्छा था कि समय रहते कहानी को एक दिशा दे दी जाए। (यह लाईन इस कहानी के हीरो...
    सितंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू
  • मौत से ठन गई- अटल बिहारी वाजपेयी

    भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जितने एक राजनेता के रूप में जनता के पसंदीदा रहें उतना ही लोगों ने उन्हें एक कवि के रूप में पसंद किया. ...
    अगस्त 16, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक पंद्रह अगस्त ऐसा भी

    पंद्रह अगस्त से  एक रात पहले सारे सिपाही बैरक में मोती चूर के लड्डू मलने में लगे थे. शहर भर के स्कूलों में फौजी कैम्प से ही मिठाई जानी थी. शहर भर के क...
    अगस्त 15, 2018 ओये बांगड़ू
  • मेरे देश की आंखें: अज्ञेय

    नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं पुते गालों के ऊपर नकली भवों के नीचे छाया प्यार के छलावे बिछाती मुकुर से उठाई हुई मुस्कान मुस्कुराती ये आंखें नहीं,...
    अगस्त 15, 2018 ओये बांगड़ू
  • नज़रों की बेरोज़गारी

    भूटान के एक खुबसूरत शहर में घुमते हुए गैर ज़िम्मेदार आज़ादी और खुबसूरत लड़की से मुलाक़ात का किस्सा बता रहे है पिथौरागढ में रहने वाले अभिजीत. अभिजीत नवाबों...
    अगस्त 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • वो बरसात की रात 

    आगरा की रहने वाली दीप्ति शर्मा अपने शब्दों को ताजमहल सी खुबसूरत रचनाओं में पिरोने वाली फ्रीलान्स राइटर हैं. आज दीप्ती ने ओएबांगड़ू को बरसात के इस मौसम...
    जुलाई 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • कारवाँ गुज़र गया- गोपाल दस नीरज

    ‘‘अगर दुनिया से रुखसती के वक्त आपके गीत और कविताएं लोगों की जबान और दिल में हों तो यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी. इसकी ख्वाहिश हर फनकार को होती है.” प...
    जुलाई 20, 2018 ओये बांगड़ू
  • हमारे कृषक- रामधारी सिंह दिनकर

    जन जन से जुड़ने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सालों पहले थी.दिनकर की लिखी ‘हमारे कृषक’ आज भी किसानों क...
    जुलाई 13, 2018 ओये बांगड़ू
  • बू – सआदत हसन मंटो (पार्ट -2)

    जो बाते आज भी समाज की दिखावटी लाज शर्म के कारण कही दबी छिपी सी रहती है उन्हें मंटो ने सालों पहले बेहद बेबाकी से लिखा. फिर वह चाहे औरत और मर्द के रिश्त...
    जुलाई 12, 2018 ओये बांगड़ू
  • बू – सआदत हसन मंटो

    शोहरत की तरह ही बदनामी कमाने वाले सआदत  हसन मंटों ने भले ही ताउम्र अपने लिखने के लिए कोर्ट के चक्कर और समाज में बुराई हासिल  की  हो लेकिन आज इतने सालो...
    जुलाई 9, 2018 ओये बांगड़ू
  • प्यार से प्यारी एक प्रेम कहानी

    सभी लोगों ने आदी की तरफ बडी नफरत की निगाह से देखा मानो आदी उस बारात का सबसे बडा  दुश्मन था. पर बचपन से ही अलहड जिंदगी गुजारता आया था आदी. ना किसी का ड...
    मई 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • अनसुनी करके – रविंद्रनाथ टैगोर

    भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखने वाले महान लेखक और चित्रकार रविंद्रनाथ टैगोर का आज जन्मदिन हैं. टैगोर ने अपनी पहली कविता 8 साल की छोटी आयु में ह...
    मई 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • विकास-विकास का नारा देता मैं

    लेखक -सुंदरम सुन्दरम्, कच्ची उम्र में समाज से जुड़ने की कोशिश करता एक युवक है जिसको देखकर आप कहेंगे कि बच्चा ही है.लेकिन लेखनी में दम है नहीं देखने म...
    अप्रैल 28, 2018 ओये बांगड़ू
  • मैं हिंदुस्तान लिखूँ,पर तुम रेपिस्तान समझना !

    लेखिका-रोशी सिंह मैं हिंदुस्तान लिखूँ पर तुम रेपिस्तान समझना ! मैं जन्म लूँ तुम एक टक तकना थोड़ा इंतज़ार करना तब बलात्कार करना…. मैं हिंद...
    अप्रैल 12, 2018 ओये बांगड़ू
  • काले तिल वाली लड़की

    कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लडकियों ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल आनाज नही होता ये पूरी दु...
    अप्रैल 10, 2018 ओये बांगड़ू
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 8

    कलौनी गुरु सरिता पांडे, जिनका औरकूट नाम सरिता पांडे जोशी था. जोशी मासाप की सबसे बड़ी बेटी है और बडाबे के जूनियर हाईस्कूल में फिलहाल सरकारी टीचर है. कह...
    अप्रैल 10, 2018 Girish Lohni
  • वो निश्छल हंसी

    सर्दियों की बारिश थी वो,जब ठंड में सिकुड़ते हुए उसे करोल बाग़ के मेट्रो पीलर के नीचे खड़े देखा था,स्वेटर भीग चुकी थी,और होंठ एक दुसरे से मिलते बिछुड़ते रह...
    अप्रैल 8, 2018 कमल पंत
  • खून सनी कुल्हाड़ी

    बहुत पहले लोग कहा करते थे कि उसके घर देर है अंधेर नही, कोर्ट के मामले में भी ऐसा ही कहा जाने लगा, कहानी काल्पनिक है लेकिन कहानी का आधार एकदम सच्चा। एक...
    अप्रैल 7, 2018 कमल पंत
  • ओछा और अच्छा

    ‘दर्दनाक हो जाता है जब वो बांस के पतले से डंडे से मेरे बगल में बैठी उस मासूम सी लडकी के हाथ में खींच कर ‘स्वाट’ की आवाज ...
    अप्रैल 2, 2018 कमल पंत
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 7

    उर्स ए पिथौरागढ़ मोह्ब्ब्त की वह दास्तान है जो एक शहर मे धीरे धीरे घट रही थी ये कहानी मे अब तक क्या क्या हुआ ये अगर आपको जानना है तो इस लिंक पर क्लिक क...
    मार्च 27, 2018 Girish Lohni
  • झन्न गुरु के कारनामे -4

    झन्न गुरु झन्नाटेदार थप्पड़ मार देने वाले उस महान विरासत के आखरी किरदार थे जिन्हें अपने जीवन में लगता था कि थप्पड़ जड़ देना ही काम का हो जाना है. पिछले त...
    मार्च 17, 2018 कमल पंत
  • अधूरी कविताएं

    अधूरी कविताएं अब तक मेरी लिखी कविताओं का निजी संकलन है। दुनिया में सबसे खतरनाक काम कविता सुनाना है क्योंकि सामने वाले को बोर करने के लिये भी आत्मविश्...
    मार्च 9, 2018 Girish Lohni
  • तुम कौन हो?

    सातवीं में पढ़ने वाला सिब्बू सरकार बड़ा होकर उपन्यासकार बनना चाहता है. कच्ची उमर में शब्दों का बड़ा पक्का है सिब्बू सरकार. गाता ही नहीं शानदार लिखता...
    मार्च 9, 2018 ओये बांगड़ू
  • प्रतीक्षा

    डा.कुसुम जोशी गाजियाबाद (उ.प्र.). डाक्टर कुसुम जोशी होलाष्टक के साथ ही पहाड़ों के गांव गांव चीर बंधी और फाग उठने लगे , घर घर से ढोल मंजीरा,हारमोनियम औ...
    फरवरी 25, 2018 ओये बांगड़ू
  • हल्द्वानी के किस्से (परमौत की प्रेम कथा)14

    चाभी के नब्बू डीयर के पास रह जाने के दुर्योग के लिए हरुवा के भन्चकत्व को ज़िम्मेदार बताने के उपरान्त परमौत ने रात के काफ़ी हो जाने और नब्बू डीयर के घर ज...
    फरवरी 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • झन्न गुरु के कारनामे -3

    झन्न गुरु अपने झन्नाटेदार थप्पड़ों के लिए तो प्रसिद्ध थे ही साथ ही अपने उग्र क्रांतीकारी विचारों के लिए भी वह खूब जाने जाते थे.मोहल्ले के मोहल्ले (अपने...
    फरवरी 23, 2018 कमल पंत
  • उर्स-ए-पिथौरागढ़ 6

    इंटर की लौंडाई हवा अगले दिन पूरी सावधानी बरतते हुए प्रदीप ने अपने पहले ट्यूशन से दुसरे ट्यूशन की दौड़ कुमौड़ से रोडवेज को जाने वाली सीधी सड़क से तय की. ह...
    फरवरी 21, 2018 Girish Lohni
  • झन्न गुरु के कारनामे -2

    झन्न गुरु थोड़ा दुनिया से अलग थे, एसा उनके पैदा होते ही चिन्ह देखने वाले ज्योतिषी ने कह दिया था,उनके पैदा होने के ग्यारहवें दिन उनका नाम रखा गया जनार्द...
    फरवरी 17, 2018 कमल पंत
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