ओए न्यूज़

ऑडियो: बुलंदशहर हिंसा जहाँ भीड़ ने अफवाह सुन पुलिस वाले को मार डाला

दिसंबर 5, 2018 ओये बांगड़ू

यहाँ सुनिए बुलंदशहर हिंसा की पूरी कहानी जहाँ  भीड़तन्त्र ने कानून नाम की चीज की चिड़िया बना दी

बुलन्दशहर के बारे में अब तक आप लोग सारी बातें जान चुके होंगे, कुछ भी बचा शायद न हो, अख़लाक़ केस की जांच कर रहे इंस्पेक्टर का मर्डर, भीड़ ने मार डाला इंस्पेक्टर, पुलिस सुरक्षित नही तो जनता क्या सुरक्षित होगी? वगेरह वगेरह आपने खूब पढ़ लिया होगा। मगर क्या इस भीड़तन्त्र के उस रूप को आप देख पाए जिसमे कानून नाम की चीज की चिड़िया बना दी गई। इंस्टेंट इंसाफ के नाम पर एक जिम्मेदार  SHO को ऑन द स्पॉट खत्म कर दिया गया, उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाला गया।

इसकी शुरुवात क्यों और कहां से हुई ये जानना समझना शायद इस मामले में बहुत ज्यादा जरूरी है.

बुलन्दशहर के एक गांव में कुछ लोगों को नजर आती है किसी मरे जानवर की हड्डियां, अरे हम बहुत आगे की सुनाने लग गए थोड़ा और पीछे चलते हैं। बुलन्दशहर के बारे में कई तरह खबर सोशल मीडिया में वायरल होती है .सोशल मीडिया पर लिखा जाता है- भारत में मुसलमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है जिससे हिंदुओं को ख़तरा है.

लिखा गया  70 से 1 करोड़ तक मुसलमान इकठा हो रहे हैं। दिल्ली से महज 60 किलो मीटर दूर मुसलमानों का ‘इज्तेमा’ दो दिन से जारी हैं। दुनिया के सबसे संगठित संगठन ‘तब्लीगी जमात’ ने यह भीड़ बिना मोबाइल फोन और आईटी के एप्स फेसबुक/व्हाट्सअप/ट्विटर पर प्रचार के बुलाई हैं। यह आलमी इज्तमा बुलंदशहर में करीब करीब 2.5 करोड़ स्क्वेयर फुट के पंडालों में हो रहा हैं जो कि करीब 7 किलोमीटर एरिया में फैले है।

हालांकि यह आयोजन मजहबी हैं, मुस्लिमों की आस्था का प्रतीक हैं पर रिपोर्ट आ रही हैं कि इसमें इतिहास पर भी बात हो रही हैं, भारत में इस्लाम और शरिया को नाज़िल करने की बात हो रही हैं।

आप लोग दिल्ली में बैठे सिर्फ यह सोचिए कि यह भीड़ पैदल चलकर सिर्फ हल्का होने दिल्ली आ जाये तो बाढ़ आ जायेगी और बेकाबू हो जाये तो कल्पना कर लीजिए।

सुरक्षा की दृष्टि से राजधानी के आसपास ऐसे किसी आयोजन की इजाजत नही होनी चाहिए थी पर योगी जी चुनावों में बिजी हैं मोदीजी जी-20 में ऐसे में दिल्ली को खुद ही सोचना होगा।

ये बस एक बानगी है और काफी संयमित भाषा मे लिखा गया पोस्ट है।

इससे ज्यादा धमाकेदार भाषा मे लिखे गए पोस्ट लगातार सोशल मीडिया में फैलने लगे,जिसमे अनियंत्रित तथ्य मतलब कहीं कहा 50 लाख कहीं 1 करोड़ कहीं दो करोड़ इकट्ठा हो रहे हैं देश को बेच खाने, देश मे हमला करने, देश को दोबारा गुलाम बनाने, जागो हिन्दू जागो वगेरह वगेरह

तो बस हिन्दू जागने लगे, अब जगकर करें क्या ये सबसे बड़ा सवाल था, सोशल मीडिया के क्रांतिकारी लगातार पोस्ट के माध्यम से उल्टी कर रहे थे कि अभी नही तो कभी नही। ये इकट्ठा हो गए हैं हिन्दू तुम कब होंगे।

फिर एक गांव स्याना से अफवाह उठी की जानवर काटे गए हैं, जानवर तो कहा ही नही गया, कहा गया कि गौकशी हुई है। गायें काटी गई हैं

स्याना के एस एच ओ थे सुबोध कुमार सिंह। उधर गांव वालों में अधैर्य बढ़ गया वो ट्रेक्टर में जानवरों की हड्डियां लेकर बुलन्दशहर हाईवे की तरफ आने लगे, यह सुबोध कुमार सिंह गाय की अफवाह में मारे गए मोहम्मद अखलाक केस के आईओ भी रह चुके हैं, इन्हें मालूम था कि भीड़ क्या कर सकती है। इन्होंने लोगों को हटाने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ बुलन्दशहर हाईवे का रुख किया। उस हाईवे से उस दिन सबसे ज्यादा तादात में जो लोग आ रहे थे वह थे मुस्लिम, इज्तेमा से वापस अपने अपने घरों को। पूरा अंदेशा था कि भीड़ का टकराव जरूर होगा। सुबोध सिंह ने गौकशी की कम्प्लेंट लेकर आये लोगों को फिलहाल जगह खाली करने को कहा और जांच का आश्वासन दिया। मगर ये भीड़ सिर्फ नेताओं के आश्वासन पर यकीन करती है जनाब ,इसका बाकी किसी पर भरोसा नही। इस भीड़ ने हटने से मना कर दिया। हालात काबू से बाहर हो रहे थे तो सुबोध सिंह ने फ़ायर कर दिया भीड़ को तितर बितर करने के मकसद से, मगर थाने को घेरे बैठी भीड़ ने थाना ही फूंक डाला और उसी दौरान एक गोली से सुबोध सिंह घायल हो गए।

सुबोध सिंह जब बचने के लिए खेतों की तरफ भागे तो उनके एक साथी ने उन्हें बचाने के मक़सद से अपनी गाड़ी उनकी तरफ मोड़ दी ताकि घायल सुबोध सिंह को हॉस्पिटल ले जाया जा सके, मगर ये बेशर्म भीड़ ने गाड़ी में तड़पते सुबोध सिंह को मार डाला, सिर्फ मारा नही, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल भी दिया ये भीड़तंत्र था।

इस सच्ची ह्रदयविदारक घटना के और भी कई पक्ष हो सकते हैं। मगर सबसे बड़ी बात ये है कि कानून के रक्षक को कानून की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवाने पड़े क्योंकि भीड़ पागल हो चुकी थी सिर्फ इस शक में कि गाय काटी गई है।

निजी रूप से मेरा मानना है कि सोशल मीडिया में फैले मेसेज् इसके लिए जिम्मेदार रहे होंगे, क्योंकि इज्तेमा में करोड़ मुसलमान आये थे और उन्होंने बीफ खाया होगा, तो बीफ के लिए गाय काटी होगी और हड्डी जंगल मे फेंक दी जैसी खूब अफवाहे फैली.

खैर जो भी हुआ वह इस समाज के लिए बिल्कुल भी अच्छा नही हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *