यंगिस्तान

दुल्हन नहीं रोई

दिसंबर 17, 2017 Girish Lohni

शुकर है कि अनुष्का शर्मा का अपनी शादी की विदाई के दौरान रोने का वीडियो आ गया. वरना दुल्हन विदाई में नहीं रोई इस आधार पर अनुष्का का चरित्रांकन कर दिया जाता. साधारण विवाह में जैसे मौसा-मौसी फूफा-फूफी और मौहल्ले की औरते शादी में  केवल वर-वधू पक्ष में कमियां ढुढ़ने को शामिल होती हैं इस खास विवाह में यह काम प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया का होता लेकिन दोनों का विवाह ही भारत से बाहर होने के कारण वे अ‍पनी इस भूमिका से बाहर रहे. हालांकि रिसेप्शन के दिन का अभी स्कोप पूरा है.

खैर भारत में शादी के दौरान दुल्हन का रोना अनिवार्य तत्वों में से एक है. फिर विवाह प्रेम विवाह हो या भाग्य भरोसे किया गया हो. दुल्हन का विदाई के दौरान न रोना इतिहास के काले पन्नों  में दर्ज किया जाता है जिसे हमेशा उन मौकों पर जबकि किसी महिला के चरित्र में मर्यादा लेप लगाना हो तथ्यों के रुप में प्रयोग किया जाता है.

दुल्हन का विदाई में न रोना, कम रोना या बहुत अधिक रोना उसके नये घर में प्रवेश से पूर्व ही उसके चरित्र की भूमिका बनाता है. दुल्हन का अधिक रोना जहाँ उसे चरित्र साफ होने  और अत्यधिक गुणवान होने का सर्टिफिकेट देता है वहीं कम रोना सामान्य लड़की होने का सर्टिफिकेट जारी करता है. दुल्हन का विदाई में न रोना न केवल उसके चरित्र पर प्रश्न चिन्ह उठाता है बल्कि यह सर्टिफिकेट जारी करता है कि दुल्हन तेज तर्रार है अतः वर पक्ष को अब उससे सावधान रहना है.

जबकि सर्वसामान्य तथ्य है कि विदाई में रोने के आधार पर किसी का भी चरित्र ना तो बताया जा सकता है और ना ही बताया ही जाना चाहिये. इसके बावजूद हमारे समाज में दुल्हन की विदाई में रोने के आधार पर हिडन सर्टिफिकेट जारी किये जाते हैं.

विवाह के उत्सव में दुल्हन की विदाई के क्षण सर्वाधिक भावनात्मक क्षणो में से एक है. इसके आधार पर चरित्रांकन कितना सही है समाज को तय करना है. समाज में महिलाओं को तय करना है कि वे और कितना भावनाओं के आडम्बरो का भार वहन कर सकती हैं पुरुषों को तय करना है कि कितनी जल्दी इन छ्दमी चारित्रिक सर्टिफिकेट को सीरे से खारिज करता है.

 

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