यंगिस्तान

भेल भंडार

जून 4, 2017 ओये बांगड़ू

चन्द्र शेखर खुलबे साहब मुम्बई में रहते हैं और संगीत में बसते हैं, खाने पीने की चीजों में भी पता नहीं कौनसा संगीत खोज लाते हैं

भेल भेल का रंग है , भेल भेल की जात , शेखर भेल सों जानिये , भेल पूरी की बात.

सूखी भेल , गीली भेल. तीखी भेल, चटनी भेल. मूंग भेल, दही भेल. चाइनीज भेल , न्यूट्रिशियस भेल.

अजी ये मैं कोई जोक या कोई कविता नहीं कह रहा. ये सब भेल की वैरायटीज हैं जो बंबई में बहुत फेमस हैं.

जब मैं पहली बार बंबई आया ठैरा , भेल भेल सुनकर पगली गया ठैरा. दिल्ली में भी भेल खाया था मगर खाली भेल पूरी. यहाँ आकर पता चला कि भेल भी कई प्रजातियों में बंटा हुआ है, जिसका जिक्र मैं ऊपर कर चुका हूं.
ये अलग अलग तरह के भेल हैं जिनमें उपयोग होने वाली बेसिक सामग्री तो एक ही रहती है मगर कुछ कुछ विशेष चीजें ऐसी होती हैं जो भेल-भेल में फर्क पैदा कर देती हैं. जैसे कि चटपटा चटनी भेल, इसमें चटनी का विशेष योगदान है. मूंग भेल , भेल में मूंग की दाल भर देते हैं. इसी तरह दही भेल , कॉर्न भेल (मकई भेल) , मटर भेल हैं.
सूखी भेल और गीली भेल में फर्क यह है कि गीली भेल में कुछ तरल पदार्थ डाला जाता है जो सूखी में नहीं होता. इन सब भेलों में चाईनीज भेल एक एडवांस भेल है , यह एक ऐसा भेल है जिसकी प्रक्रिया अन्य भेलों से बिल्कुल अलग है. इस भेल को फ्राई कर दिया जाता है और चटनी से खाया जाता है.
तो भाई साहब ये ठैरी भेल की कहानी. भेलपूरी तो आपने खायी ही होंगी मगर जिंदगी में कभी मौका मिले तो ये विशेष तरह के भेलों को भी अवश्य ट्राई करें.

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