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बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम

अक्टूबर 31, 2016 ओये बांगड़ू

शराबी को तो बस पीने का बहाना चाहिए और फेस्टिव सीजन में तो शराबी खूब झूमता कभी ठेके को तो नालियों को चूमता नज़र आ ही जाता है. समस्त दारूबाज भाइयों को सादर समर्पित करते हुए विनोद पन्त ने एक जबरदस्त पैरोडी लिखी है आप भी पढ़िए ‘बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम…’

बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम

कसम चाहे ले लो चिलम की कसम

शहरों में जितने दारू के ठेके ….

हमने सभी में खाते हैं खोले ….

नीबू चाटके भी ना नशा होता कम …

बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम .

नमकीन ना हो तो नमक से पी जाते …

दारू चढे तो फिर खाना भी ना खाते ..

चार पैग मैं ही बन जाते पक्के बेशरम …

बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम .

लीवर की हमने खड़ी कर दी खटिया .

किडनी बेचारी की डुबो दी है लुटिया ..

एक भी बीमारी ना छोड़ेगे हम .

बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम .

पीकर के दारू हम सबको दें गाली …

चले लड़खड़ा के तो घुस जायें नाली ..

सड़क पर ही सो जाते हैं कुत्तों के संग …

बहुत दारू पीते हैं हम तो सनम .

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