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बच्चों की पाठशाला है उत्तरायणी का कार्यक्रम

जनवरी 13, 2019 ओये बांगड़ू
  • बलजीत नगर के विजय पार्क में श्री कुमाऊं कीर्तन मंडली द्वारा उत्तरायणी मेला आयोजित किया जा रहा है। दिल्ली के प्रवासी उत्तराखंडी लोगों को उत्तरायणी पर उत्तरायणी जैसा महसूस कराने के उद्देश्य से कुमाऊं कीर्तन मंडली द्वारा कुमाऊंनी संस्कृति की सम्पपूर्ण झलक इस मेले में रखी गई है।

झोड़ा, चांचरी,न्योली,सब यहां मौजूद हैै।
ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य क्या है? पॉजिटिव नेगेटिव दोनो तरह की बातें हम कर सकते हैं। लेकिन इस फोटो पर गौर कीजिए एक् पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी को कुमाउनी संस्कृति की जानकारी दे रही है। दिल्ली में पले बढ़े बच्चे अक्सर यह कहते हैं कि हमें अपनी संस्कृति की ज्यादा जानकारी नही, क्यों? क्योंकि कभी किसी ने बताया नही। क्यों? क्योंकि पहले कभी ऐसे प्रोग्राम हुए नहीं, पहले कभी बुजुर्ग और बच्चे ऐसे कार्यक्रमों में एक् साथ बैठे नही। पहले कभी बुजुर्गों को अपने बच्चों को यह बताने का मौका नही मिला कि वह किसी परिवेश किस संस्कृति में पली बढ़ी हैं उनकी संस्कृति क्या है। वह अपना ज्ञान अपने बच्चों को दे नही पाई और बच्चे सीबीएससी के सेलेबस में बिजी रहे।

खैर ऐसे कार्यक्रमों के जरिये बच्चे बहुत कुछ सीख रहे हैं।बुजुर्ग जब बच्चों को बताते हैं कि ऐसे झोड़ा चांचरी के स्टेप होते हैं तो बच्चे घर मे उसे जरूर ट्राय करते हैं अपने सीबीएससी सिलेबस से बाहर आकर अपनी कुमाउनी संस्कृति को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं।
बच्चे न्योली सुनकर घर मे उसे दोहराते हैं यूट्यूब में सर्च करते हैं, और उसके प्रति आकर्षित भी होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के जरिये इतने बढ़िया काम हो रहे हैं ये एक सराहनीय पहल है। श्रीकुमाऊं कीर्तन मंडली का यह कार्यक्रम बलजीत नगर के बच्चों के लिए एक् पाठशाला सरीखा है । बच्चों की संस्कृति की पााठशाला।

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