यंगिस्तान

ऑडियो:सातवां सालाना डोयाट (2018)(पहला दिन)

दिसंबर 6, 2018 ओये बांगड़ू

ऑडियो सुनने के लिए इधर क्लिक करें 

लखनऊ से हरिद्वार 518 किलोमीटर (कुल जमा 518 किलोमीटर)

घुमक्कड़ी धर्म को बढ़ाने के क्रम में आखिर कार आज अपने सालाना डोयाट पर निकल पड़ा. पिछले साल हम ख्याल दोस्त उमेश पुजारी के साथ हुई नेपाल भूटान की यात्रा के बाद इस साल यूं अकेले निकलूंगा सोचा ना था.

साथी दोस्तो से ना सुनने के बाद बिना ज्यादा सोचे आज तड़के सुबह 5 बजे लखनऊ छोड़ दिया. इस बार कुछ नए डेस्टिनेशन अपनी घुमक्कड़ डायरी मे दर्ज करने का ख्याल रखते हुए स्पिती घाटी की योजना बना डाली. इस पूरी यात्रा को दिवस वार घुमक्कड़ मित्र रिस्की पाठक ने डिज़ाइन करा , जिसे स्पिती सर्किट का अच्छा अनुभव है.

सुबह निकलने के उतावलेपन मे पहली बार पता चला रात काटने मे भी बखत लगता है. घुमक्कड़ी किस्से बनाती है, वो किस्से जो दस सालों बाद मिले दोस्तों के किस्से होते हैं. लखनऊ से निकल कर पहला ब्रेक सीतापुर मे लगाया, ढाबे का खाना बाइकर्स का पसंदीदा हुआ,और इस तरह की घुमक्कड़ी मे इसका स्वाद कुछ ज्यादा ही चड़ता है, ढाबे के आलू पराठे उस ढाबे की पहचान होते हैं, और शायद इसीलिए उन पर ज्यादा मेहनत होती है.

शहरी पिज्जा को पीछे छोड़ते मक्खन बहता हुआ जैसे कह रहा हो, आओ डूब जाओ मुझ में. 100 किलोमीटर चलने के बाद ऐसा नाश्ता और वो ढाबे के अंगीठी की खुश्बू का कॉम्बिनेशन शायद यूं ही ना बना हो. यहां से निकल कर शाहजहाँपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबा बाद, पार करते हुए अविरल गंगा को अपने सामने हरिद्वार में देख रहा हूँ, विनोद पन्त अंकल का धन्यवाद चाय पर चर्चा के लिए और शहर से रूबरू करवाने के लिए.

अब कल देहरादून, मसूरी, तियूनी, होकर नारकन्डा (हिमाचल प्रदेश) पड़ाव डालने की सोची है. आज के लिए हरिद्वार से फ़िलहाल इतना ही. अंत मे एक सलाह उत्तर प्रदेश पुलिस, और उत्तराखंड पुलिस के लिए अपराधों के निपटान के लिए कृपया मुरादाबाद से नजीबा बाद तक के रास्ते की दो पहिया सवारी को अपने थर्ड डिग्री टॉर्चर मे शामिल करें, यकीनन दोनों प्रदेशों के अपराध ग्राफ़ मे अच्छी गिरावट आएगी

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