यंगिस्तान

Audio घुमक्कड़ी: नाको से काज़ा (5th डे )

दिसंबर 24, 2018 ओये बांगड़ू

जहाँ पीने का पानी भी बर्फ बन गया वहां का किस्सा सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें –

नाको से काज़ा

105 किलोमीटर ,कुल जमा (1218 किलोमीटर)

नाको मे रात सोच से भी ज्यादा ठंडी निकली, होटल वाले दोस्त ने बताया रात को तापमान -10 पहुंच गया था. संभवतः मैंने इतने ठंडे तापमान मे पहली रात गुजारी हो. जिस होटल (लेक व्यू) मे मैं रुका था उसके सामने नाको लेक थी, जो बर्फ से जमी हुई थी, और नाको आधा बर्फ से पटा था, किस्मत अच्छी रही कि नाको मे ये होटल मिल गया 1000 रुपये मे सौदा तय हुआ, हालाकि वो अगर 2000 भी बोलता तो मुझे रुकना होता. मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था. खैर नाको पूरा जमा था, होटल के टॉयलेट बाथरूम सब बंद थे, एक कॉमन टॉयलेट खुला था. रात बहुत ठंडी निकली, होटल के केयर टेकर जो जम्मू के बटाल का था, ने वादा किया कि वो सुबह 6.30 बजे नाको मोनेस्ट्री की पूजा दिखाएगा. सुबह नींद 5.30 ही बजे खुल गई थी, सुबह एक विचित्र घटना घटी, जो पानी रात को रखा गया था वो बाल्टी समेत सुबह तक जम चुका था और ये बात मुझे थोड़ा देर मे पता चली, आप समझ रहे होंगे. किसी तरह उसकी ऊपर की लेयर तोड़ कर जरूरी काम निपटाए.

अब मैं तैयार था, घड़ी 6 बजा रही थी, हल्का उजाला हो चुका था, रात भर नाको के खच्चर राग अलापते रहे, जिनकी भीषण अवाज पूरे नाको गाँव मे गूंजती रही. सुबह जब मैं होटल मे बैठा था तो मैंने एक अलग अवाज सूनी, बाहर निकल कर देखा तो दो लोमड़ी या सियार (रेड फॉक्स) जमी नाको झील मे खेल रहे थे, मैं तुरंत उनको देखने दौड़ा. 15 मिनट उनके करतब देखता रहा फिर धीरे धीरे उनकी तरफ बढ़ता चला. आगे बढ़ते हुए बर्फ मे पड़ते मेरे पैर उन्हे अगाह कर रहे थे, अब मैं उनकी नजर मे था, थोड़ा इन्तज़ार करने के बाद डर महसूस होते ही वो भाग निकले. मैं वापस लौट के होटल आ गया.

तब तक  केयर टेकर भी आ गए उन्होने बताया वो मोनेस्ट्री हो आए, मेरे ज़िद करने पर वो दुबारा जाने के लिए तैयार हो गए. नाको गाँव के बीच से होते हुए हम मोनेस्ट्री पहुंचें, यहां अंदर जाने के बाद हमे लामा मिले. जो अपने काम मे व्यस्त थे. केयर टेकर को देखने के बाद वो बोले इतनी जल्दीबाजी फ़िर आ गए. सवाल दागने के बाद तुरंत ही बोल पड़े बैठो. ये उनके रहने का कमरा था, अंदर भट्टी थी जिसमे पानी गरम हो रहा था, और चिमनी से धुँआ बाहर निकल जा रहा था. सामने lcd लगी थी जिसमे कोई न्यूज चैनल वाले सुबह सुबह जंगल का नियम बता रहे थे. चाय पीने के बाद वो हमे मोनेस्ट्री ले गए. ये 1100 सौ साल पुरानी मोनेस्ट्री थी, जो तबसे वैसे ही है. अब लामा जी ने बताना शुरू किया, और किसी बच्चे को तरह मैंने भी अपनी तमाम जिज्ञासा शांत करी, मोनेस्ट्री के अंदर उन्होने काफी देर तक बुद्धिश्म पर चर्चा करी अपने देवता और भगवान पर चर्चा करी. जीवन के पांचों तत्वों पर चर्चा करी और कैसे वो बौध धर्म से जुड़े हैं ये बताया.

मोनेस्ट्री के अंदर फोटोग्राफी मना है लेकिन मेरी जिज्ञासा देख कर उन्होने फोटोग्राफी लेने की इजाजत दी, और उसे सार्वजनिक ना करने को कहा. बहुत गहन चर्चा के बाद लगा नाको आना सफल हो गया, करीब डेढ़ घंटा उनके द्वारा मुझे दिए गए, साथ के केयर  टेकर भी बोलने लगे लामा जी इतना समय किसी को नहीं देते. इतिहास बताते हुए कहते हैं कि एक राजा हुए करते थे जिनके दो शिष्य हुआ करते थे, तो दोनो मे एक दिन अपने को श्रेष्ठ करने की शर्त लगी, तो एक शिष्य ने एक ही दिन मे नाको नहर 25 किलोमीटर बना डाली, और दूसरे शिष्य बदर (dharmpal) ने नाको मोनेस्ट्री एक ही दिन में बना डाली. नाको मोनेस्ट्री मे आने वाली 8 तारीख को किन्नौर का लोसार है. लोसार नए साल का जश्न होता है, हर डिस्ट्रिक्ट का अपना अलग अलग होता है, स्पिती मे नवम्बर में लोसार हो चुका है. करीब एक घंटे की फसक लगा कर हम 10 बजे काज़ा की तरफ निकल पड़े, नाको चौराहे मे आधे किलो के दो आलू पराठे हौक्ने के बाद हम निकल पड़े. नाको से बमुश्किल 10 किलोमीटर चलने पर आता है मलिंग नाला जी हां बहुत से बाइकर्स की हड्डी तोड़ने वाला मलिंग नाला. किस्मत से इस समय पानी कम था क्यूंकि पूरा पानी जम चुका था, पूरे नाले से गिरते हुए पानी को जमे देखा अपने आप मे गजब अनुभव था.

चांगो को पार करते हुए हम समडू के करीब पहुंच जाते हैं

यहां हिमाचल पुलिस की चौकी है जहां एंट्री करानी होती है, यहीं से लाहौल स्पिती जिले की सीमा शुरू हो जाती है. यहां से शिचलिंग तक फोटो, विडियो ग्राफी मना है ये एरिया आर्मी के अंडर है यहाँ उसी के कानून चलते हैं. आगे ताबो के रास्ते से एक रास्ता अलग कट ता है जो ग्यू मोनेस्ट्री जाता है जहां 500 साल पुरानी ममी रखी गई है. इसे मैंने वापसी के लिए छोड़ दिया. ठंड काफी बढ़ गई थी, ताबो में भी एक मोनेस्ट्री है. ताबो मे हमे ब्लू शीप का एक झुंड दिखा जो ताबो वाले इलाके मे देखते जा सकते हैं. यहां से हरिया घोड़े को दौड़ाते हुए मैं पहुंच गया धनकर गाँव, जो काज़ा रोड से 8 किलोमीटर ऊपर है. ये 1000 साल पुरानी मोनेस्ट्री है और स्पिती जिले की पांच मोनेस्ट्री (ताबो, धनकर, पिन, की, काज़ा) मे सबसे पुरानी है. मोनेस्ट्री पूरी मिट्टी की बनी हुई है. धनकर गाँव की कुल आबादी कोई 600 के आस पास है. जाड़े मे स्पिती आने का फायदा ये हुआ कि यहां सबके पास टाइम है. मोनेस्ट्री मे घुसते ही पतले पतले रास्ते सीढ़ी से ऊपर चढते हैं. यहाँ 25 रुपए का टोकन ले के लामा जी अंदर ले जाते हैं. आज का दिन बड़ा अच्छा निकला लामा खुद मुझे सब बताने लगे और सब चीजें परत दर परत खोलने लगे. करीब आधा घंटा गुफ्तगू के बाद उन्होने चाय के लिए पूछा तो मैंने तुरंत हां कर दी क्यूंकि इसी बहाने मुझे उनसे थोड़ी और बात करने को मिल जाती. यहां के मकान मिट्टी के बने हैं जिनमे छत मे एक घास की लेयर फिट है जिसे पेमा बोलते हैं ये बारिश से मिट्टी को बचाती है. हर मोनेस्ट्री के अपने भगवान अलग हैं. यहाँ चोंगपा (शायद ये ही नाम था), भगवान बुद्ध, और भविष्य के बुद्ध मैत्रेयी बुद्ध की तस्वीर लगी है. धनकर मोनेस्ट्री मे बुध के शिष्यों द्वारा तिब्बत से लाई गई 108 हस्त लिखित किताबें रखी गई हैं और बताया गया ये सब सालों पहले पैदल कंधे पर लाद कर लाई गईं हैं.

यहां एक बेहतरीन चीज और भी है, यहां बुद्ध के शिष्यों की मानव निर्मित फोटोग्राफी लगी हैं जिन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में बुद्ध के दिए ज्ञान को फैलाया था. लामा बताते हैं स्पिती की सभी मोनेस्ट्री मे सबसे पुरानी ये ही मोनेस्ट्री है और सबसे बाद तक भी ये ही मोनेस्ट्री रहेगी बकायदा मोनेस्ट्री के गेट पर एक बोर्ड इस बात की घोषणा करता है. करीब एक घंटा धनकर मे बिताने के बाद मैं काज़ा के लिए चल पड़ा एक और बात धनकर के पास ही स्पिती और पिन घाटी अलग होती हैं. पिन से आने वाली पिन नदी और स्पिती से आने वाली स्पिती नदी दोनों यहीं मिलती हैं. काज़ा से 16 किलोमीटर पहले अट्रगू से पिन घाटी के लिए पुल कट जाता है. पिन घाटी वाइल्ड लाइफ पार्क के अंदर आती है जिसके लिए परमिट की जरूरत होती है और वो dfo काज़ा द्वारा जारी होता है. आगे लीदंग होते हुए हम 4.30 बजे काज़ा पहुंच जाते हैं. यहां सबसे पहला काम पेट्रोल भराया गया क्यूंकि इसके बाद 220 किलोमीटर बाद recong peo मे ही पेट्रोल मिलेगा और हमारी किस्मत से पेट्रोल पंप के बगल मे ही एक होटल मिल गया जिसे मैंने दो दिन के लिए रख लिया है. अब कल की, हिक्कीम, किब्बर, चेचम, लांगज़ा की ओर देखा जाएगा. काज़ा में अभी तापमान – 8 है.

 

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