यंगिस्तान

Audio Travelogue – काज़ा से रे कोंग पीओ (7th डे)

जनवरी 1, 2019 ओये बांगड़ू

काज़ा में हड्डी चटकाने वाली ठंड का सफरनामा पढने के लिए यहाँ क्लिक करें –

काज़ा से रे कोंग पीओ

250 किलोमीटर कुल जमा (1573 किलोमीटर)

काज़ा में हड्डी चटकाने वाली ठंड पड़ रही है, यहां के लोगों का कठिन जीवन बहुत कुछ सिखाता है. – 10 मे भी जिन्दगी नॉर्मल चल रही है. दुकाने खुल रही हैं काम हो रहा है, बस अब 5 महीने के लिए टुरिस्ट नदारद हैं. मई से फिर बाइकर्स की गाड़ियों की आवाज पूरी घाटी मे सुनाई देगी. हालांकि यहां की सर्दी से कुछ कुछ अपनी दोस्ती हो गई थी. होटल के बाहर अपने कुछ दोस्त भी बन गए थे. एक दिन पहले हिक्किम, कौमिक, लांगज़ा, कीह, किब्बर, चेचम देखने के बाद अब समय था स्पिती घाटी को अलविदा कहने का. एक चीज कहना चाहूंगा स्पिती घाटी वाकई खूबसूरत है. पहाड़ मिट्टी, और चट्टान के हैं, वनस्पति के नाम पर कहीं कहीं झाड़ी है. मेरी सुबह 6 बजे हो गई थी, आठ बजे काज़ा के उठने का इन्तज़ार किया. ये होटल एक मात्र पेट्रोल पंप से लगा था, और इसकी मेहमान नवाजी बिल्कुल घर जैसी थी.

सुबह 9 बजे काज़ा को एक नज़र ताकते हुए मैं काज़ा से बाहर निकलने लगा. आज का सफर लम्बा था और बेहद कठिन. Reckong pio से kaza बेहद कठिन सफर माना जाता है.सुबह काज़ा मे आलू के पराठे फिर लाइफ सेवर बने, क्यूंकि हमे दिन मे कहीं नहीं रुकना था तो हम पेट को यहीं गरम करते हुए निकल पड़े. सुबह हवा बहुत सर्द थी. ऐसा लग रहा था जैसे हिम्मत को परख रही हो. अपन भी बिल्कुल लगे थे रास्ते नापने मे करीब 100 किलोमीटर तीन घंटे में नप गए, इसके बाद वाले 100 किलोमीटर बेहद कठिन थे. मैं ताबो और गियू बाद मे देखने के लिए छोड़ आया था. शिचलिंग से समदु तक फोटोग्राफी नहीं कर सकते, ये एरिया itbp के हवाले है. ताबो मोंनेसट्री आज बंद थी. बाहर से देखने के बाद मैं आगे के सफर के लिए निकल पड़ा.

ताबो से आगे बढ़ने पर गियू गाँव के लिए एक सड़क जाती है, गियू गाँव यहां से 8 किलोमीटर अंदर है. यहां की खाशियत यहां रखी 500 साल पुरानी के ममी है. गियू पहुंच कर मैं ऊपर मोनेस्ट्री गया. ये नई बनी थी. यहां itbp का एक जवान रहता है जो आपको वो कमरा खोल के ममी दिखाता है. बताया जाता है ये ममी खुदाई के समय निकली, जब यहां खुदाई में हो रही थी तो जमीन से खून निकला जिसके बाद ये बॉडी ऊपर निकाली गई. किसी बौध मोंक की पहचान कर इसे ममी की शक्ल दे दी गई. खास बात जो पता चली कि इस ममी के नाखून और बाल अभी भी बढ़ते हैं. इसे काँच के फ्रेम मे रखा गया है और आस पास और दूर से भी लोग इसे देखने आते हैं. गियू गाँव से पुराना पैदल रास्ता तिब्बत जाता था, जहां पहले समय इसे ट्रेड के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

यहां से सामने दिखते पहाड़ के पीछे वाले हिस्से से चीन की सरहद लगती है, इसलिए ये इलाका सेंसिटिव ज़ोन मे आता है. आधा घंटा जवान के साथ बात करने के बाद मैं गियू गाँव से निकल पड़ा नाको होते हुए recong pio के लिए. आगे NH को चौड़ा किया जा रहा है, जगह जगह भारी मशीन लगी हैं, साथ ही ब्लास्टिंग भी की जा रही है. फिर सीधे गाड़ी पकड़ के मैं शाम 6 बजे अपने उसी होटल पहुच गया, होटल रिदंग जहां मैं पहले रुका था. इस बार होटल मालिक ने कहा आपके हिम्मत की सलाम के लिए 200 रुपये का डिसकाउंट मैं देता हूँ. सोलो ट्रैवलिंग मे जितना रुपया बच जाए उतना आपके सफर के लिए अच्छा ही होता है. अब कल शिमला के लिए निकला जाएगा, उसके बाद सोचता हूँ उत्तराखंड मे कहाँ से एंटर करूँ. तब तक के लिए

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