यंगिस्तान

ऑडियो:सातवां सालाना डोयाट (2018)(दूसरा दिन)

दिसंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू

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दूसरा दिन 28.11.2018 
हरिद्वार (उत्तराखंड) से गुम्मा (हिमाचल प्रदेश)
200 किलोमीटर 
कुल जमा लगभग 718 किलोमीटर

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कल रात निढाल शरीर कब बिस्तर पर पड़ा कुछ याद नहीं रहा. कठिन 500 किलोमीटर दू पहिए पर करने के बाद रात 10 बजे तक हरिद्वार शहर से गुफ्तगू की गई. और जो समझ मे आया वो ये था कि हम आदम जात हकलैट किस्म की प्रजाति हैं. कैसे एक शहर मे भूसा भरना है बखूबी हमे आता है. आस्था के नाम पर भौंड़ापन, डीजे पर बजती बेतरतीब आवाज पता नहीं यहां के लोगों को घुटन क्यूँ नहीं करती.

रात शहर खंगालने के बाद सुबह 5 बजे गंगा आरती देखने के मन से 5 बजे निकल पड़ा, हरिद्वार के अपने धार्मिक महत्व होंगे, मेरे लिए ये एक प्राकृतिक घटना भी है, जहां देश की एक लंबा नदी प्रवाह तंत्र शिवालिक को छोड़ मैदान मे उतरता है, और अपने साथ लाए अवसादो से एक अच्छी पट्टी मे अनाज उपजाती है.

आरती सुरु हुई पार्श्व मे अनूप जलोटा गंगा को अपनी आवाज मे पुकार रहे थे. करीब 15 मिनट के बाद सब मौन हो गया. इसी से पता लगा की आरती ख़तम हो गई. माइक से एक महोदय बराबर चंदा देने की हिदायत देते सुने जा रहे थे, बिचौलियों से बचने के लिए अपने अथॉरिटी एजेंट के कपड़े का रंग तक बता दिया गया. करीब दो घंटे तक घाट मे लोगों का चुरन कटते देखा,उसके बाद 9 बजे अपन देहरादून के लिए निकल पड़े, आज दिमाग मे एक बात डाल ली अब लखनऊ के ट्रेफिक को देख के BP नहीं बढ़ाया जाएगा देहरादून का ट्रेफिक उससे कई आगे है.

देहरादून पहुंचने से पहले रिस्पना फ्लाई ओवर पर एक हलकी दाढी वाले आदमी ने अपहरण करते हुए अपने पीछे कर लिया, अपहरण की ऐवेज मे मेथी के दो पराठे, रोटी भान्ग की चटनी, ताज़ी हरी सब्जी पैक कर दी गई जिसे कालसी पर रोड के किनारे बैठ कर पेट के हवाले किया गया. अपहरण किए गए आदमी को दूसरे अड्डे ले जाया गया जहां एक महिला द्वारा फोन पर मारने की सूचना दी जा रही थी.

अपह्रत मुझ आदमी के पास कोई चारा नहीं था. वहां से मौका पा कर निकल लिया गया. अब जो था हमे जाना था आज नार कंडा जो गूगल मियां करीब 300 किलोमीटर दिखा रहे थे, और नकली राजधानी से निकलते 1 बज चुका था, इतना तो पता था आज नार कंडा पहुचना पॉसिबल ही नहीं है. तो सोचा जितना सेफ साइड मे चल सकते हैं चला जाए. देहरादून से कालसी कोई 45 किलोमीटर होता है सर पट रोड सांप की तरह बढ़ती जाती है. कालसी पहुचने के बाद मीनस जाने का रास्ता खोजा जाता है, ये जगह उत्तराखंड को हिमाचल प्रदेश से अलग करती है टोंस की मदद से. मीनस पहुँचते कोई 4.30 बज गया था, दिमाग कह रहा था कि अब रात के लिए छत ढूंढ ली जाए, ऐसे छोटे कस्बे मे कोई होटल मिलना बहुत मुस्किल होता है. यहां सोचा एक चाय पी जाए और अपने रुकने का जुगाड़ ढूंढा जाए, तो आगे एक गाँव पड़ता था रोहना वहां चाय पी, और चाय पिलाने वाले जोगेन्द्र चौहान साहब से अच्छी गप्प लगी, चौहान साहब बताते हैं ये एरिया टमाटर, और शिमला मिर्च के लिए फैमस हुआ.

उनसे आगे ठौर ठिकाना पूछा गया तो उन्होने गुम्मा एक जगह का नाम लिया, ये एक थोड़ा बड़ा कस्बा था, यहां सस्ते होटल मिल जाते हैं, ऐसा उन्होने बताया. अब जिस रास्ते पर हम थे वो था NH 707 और कसम से 25 फीट की सिंगल पट्टी की ये रोड ऐसी थी जैसे किसी ने पूरी रोड उधेड़ दी हो, खैर गुम्मा पहुच के ठौर ठिकाना तो मिल गया, अब कल सुबह आज के अधूरे रास्ते को पूरा किया जाएगा कल नार कन्डा होते हुए रामपुर, काल पा, पूह, नाको जहां तक जाया जाएगा वहां तक जाएगे, इतना तो पता है कल बिल्कुल हट के सब दिखने वाला है. तो गुम्मा से आज के लिए इतना ही कल फिर ले चलेंगे डोयाट पर, तब तक 

पहले दिन का ऑडियो इस लिंक पर मिलेगा.ज्यादा समय नहीं लगेगा,मजे में सुन सकते हैं

ऑडियो:सातवां सालाना डोयाट (2018)(पहला दिन)

 

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