बांगड़ूनामा

अट्रेक्शन की कहानी

सितंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू

बुढ़ापे में आकर किसी रोमांटिक कहानी के आधे पेज सत्य और आधे काल्पनिक लिखने से अच्छा था कि समय रहते कहानी को एक दिशा दे दी जाए। (यह लाईन इस कहानी के हीरो ने अपनी 45 वर्ष की अवस्था में कही )
अट्रैक्शन जिसे कुछ लोग प्यार भी समझ लेते हैं उसने कहानी के हीरो को घेर रखा था, वह दो बार इसी अट्रैक्शन का शिकार हो चुका था, और तीसरी बार कदम संभाल कर चल रहा था, वह हर उस लम्हे को चेक करता जो उसके साथ घट रहा था। वह खुद को बार बार यह यकीन दिलाता कि ये वाला भी अट्रैक्शन है(अर्थात तीसरा), ये भी कुछ समय के लिए ही रहेगा। इस बीच अट्रैक्शन इतना अट्रैक्ट करने लग गया कि उसका दिशा गति ही बदल गयी, वह एक कॉमेडी एक्टर से एंग्री यंग मैन में बदल गया। बात बात पर चिढ़ना गुस्सा होना। ये सब उसकी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन गए।

एक पोसिटिव रिजेक्टेड लवर से वह नेगेटिव इडियट बनता जा रहा था, सी आई डी के ए सी पी की तरह वह हर उस बात को शक की नजर से देखने लगा जो उसके अट्रैक्शन के साथ जुडी थी, उससे मिलने वाले, उससे बात करने वाले हर शख्स में उसे क्रिमिनल नजर आता और एक कुशल जासूस की तरह वह मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश में लग जाता। इस तरह उसे हर बात में खोट नजर आती, उसके पास हर बात का क्लियरीफिकेशन नहीं था, इसलिए जब भी अट्रैक्शन उससे पूछती कि ये क्या नयी बेवकूफी है तो वह ब्रांड न्यू बहाने के साथ हाजिर हो जाता।

लेकिन हाय री किस्मत उसका हर नया बहाना उस पर ही भारी पड़ रहा था और वह दिल बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है कि तर्ज पर खुद को समझाता कि अट्रैक्शन सिर्फ अट्रैक्शन होता है। रोमांटिक कहानी का पहला अध्याय यहाँ शुरू होता है जब हीरो अपने थर्ड अट्रैक्शन से दूरी बनाना शुरु करता है, एक महान संत कह गए थे कि तिबारा रिजेक्ट होने से अच्छा चुपचाप ‘वी आर गुड फ्रेंड की थ्योरी ‘ फॉलो करो (संत का नाम कहानी का राइटर ) ।

हीरो अट्रैक्शन को अब इग्नोर करना चाहता था, लेकिन यहाँ भी वह नाकाम रहा, क्योंकि वह कर ही नहीं पाता, इस बीच अट्रैक्शन की एक सहेली ने उसकी इन हरकतों को नोट कर लिया, वह कोइ नयी कहानी पेश करे इस डर से बेवकूफ हीरो अपना एक नया बहाना लेकर फिर अट्रैक्शन के सामने हाजिर हो गया।

और फिर हमेशा की तरह मुंह की खा के वापस लौटा , अब उसे एक लंबे ब्रेक की जरुरत महसूस होने लगी, ऊपर से अट्रैक्शन उसके नए बदले बिहेवियर से बहुत परेशान थी। हीरो ने इसका एक अचूक इलाज ढूंढ निकाला और वापस सेंकेंड अट्रैक्शन के पास लौट गया, जो उसे आलरेडी रिजेक्ट कर चुकी थी।

इससे दो फायदे हुए पहला सेकेण्ड को लगने लगा कि हीरो सीरियस बन्दा है और थर्ड वाले को लगा कि इसका आलरेडी लव है तो ये इस चक्कर में कभी नहीं पड़ेगा। मतलब एक तीर दो निशाने।

अब कहानी का क्लाइमेक्स, अचानक हीरो लंबे चिंतन में चला जाता है थ्री इडियट के राजू की तरह 106 हड्डियां तुड़बाने के बाद और तीन महीने बेड में रहने के बाद उसे ध्यान आता है कि वह इन चीजों के लिए बना ही नहीं है, वह तीन महीने गहन चिंतन करके निष्कर्ष निकालता है कि अट्रैक्शन के चक्कर में वह वह रहा ही नहीं जो वह था। इसलिए पहले खुद को वह बनाओ जो थे।

और इस लंबे चिंतन के बाद वह खुशी खुशी अपने सभी पूर्व और नए अट्रैक्शन से बाहर निकल आता है। और लग जाता है ब्रांड न्यू अट्रैक्शन की तलाश में अनन्त की ओर…………..

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