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अटल की अटल यात्रा

अगस्त 17, 2018 ओये बांगड़ू

नब्बे के दशक में पैदा हुये किसी भी बच्चे की याद में भारत के प्रधानमंत्री के रुप में अटल बिहारी वाजपेयी की छवि स्पष्ट होगी. अटल  बिहारी देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिनकी बात पर विरोधी भी टेबल थपथपाते थे. यह अटल बिहारी का विराट व्यक्तित्व ही है कि अटल के बाद और उनसे पहले के प्रधानमंत्रियों की तुलना अटल से ही की जाती है.

तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी अपने भाषणो के लिये लोकप्रिय थे. ठंड हो या गर्मी हो जनता अटल को सुनने के लिये टस से मस नहीं होती थी . 1977 में विदेश मंत्री के तौर पर अटल ने सयुंक्त राष्ट्र महासभा में जब पहली बार हिंदी में भाषण दिया तो पूरे देश में यह भाषण अगले एक हफ्ते तक रेडियो में प्रसारित हुआ. विश्व मंच पर हिंदी को पहचान दिलाने का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है.  अपने भाषण में उन्होने इजराइल के वेस्ट बैंक को गाजा में शामिल किये जाने की तीखी आलोचना की थी.

अटल  बिहारी ने सक्रिय राजनीति से वर्ष 2005 में सन्यास ले लिया था. 2005 में राजनीतिक सन्यास लेने का अटल का भाषण उनका अंतिम भाषण था. यह भाषण उनके राजनैतिक जीवन का सबसे छोटा भाषण था. वाजपेयी ने यह भाषण मुम्बई के शिवाजी मैदान में दिया था. उनकी आखिरी तस्वीर वर्ष 2015 में तब आयी थी जब उन्हे भारत रत्न का सम्मान दिया गया था. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हे यह सम्मान उनके घर जाकर सौंपा था.

अटल बिहारी को वर्तमान भारतीय राजनीति  का भीष्म पितामह कहा जाता है. अटल भारत छोडो आंदोलन के दौरान जेल गये थे. आजादी के बाद भी इमरजेंसी के समय भी अटल को जेल हुई थी. 18 साल की उम्र में राजनीती में कदम रखने वाले अटल  47 सालों तक संसद सदस्य रहें. उन्हें 10 बार लोकसभा और दो बार राजसभा के लिए भी चुना गया.  26 पार्टियो के समर्थन से सरकार चलाने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री थे.  अटल पहले ऐसे गैर कांग्रेसी नेता थे जिन्होने प्रधानमंत्री के पद पर अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया.

अटल बिहारी में एक राजनेता के साथ-साथ एक कवि बसता था. अपने भाषणों के दौरान वह अकसर कविता सुनाया करते थे.  उनकी कहीं एक लाइन भी अपने आप में  सम्पूर्ण अर्थ लिए होती थी. अटल की रचनाओं का जादू आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलता है . मौत से ठन गई , हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, गीत नया गाता हूं और मेरी इक्यावन कविताए खासा लोकप्रिय है.

अटल बिहारी वाजपेयी की बतौर  प्रधानमंत्री  कई ऐसी  उपलब्धियों रहीं जिन्होनें जन जन को फायदा पहुंचाया जैसे – सर्व शिक्षा अभियान , स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, दिल्ली में मेट्रो प्रोजेक्ट, भारत में टेलीकॉम क्रांति साथ ही कई ऐसे प्रोजेक्ट रहे जो अटल के अटल इरादों का परिचायक बनें  जैसे साल 1998 में हुआ  परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध आदि .

 

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