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पाव ने समोसे को भी नहीं बक्शा

अक्टूबर 10, 2016 ओये बांगड़ू

रे बांगड़ू मुबईया पाव  बहुत खाते है. हर कोई हर तरफ पाव ही पाव करता फिरता है. कोई बाहर वाला मुबई चला जाए तो जरुर सोचेगा यह पाव ही बड़ी खासियत है मुंबई की , मुंबई में रहने वाले बांगड़ू चंदर शेखर बता रहे है क्या है आमची मुंबई का पाव

मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी में पाव का महत्वपूर्ण योगदान है. हर चीज में पाव. अंदर पाव बाहर पाव,  ऊपर पाव नीचे पाव , यत्र  तत्र सर्वत्र पाव ही पाव. पाव के बिना मुंबई का फूड अधूरा सा ही लगता है.

दरअसल पाव वैसे कोई विशेष आइटम नहीं है. हम अपनी आम भाषा में जिसको “बन” कहते हैं वही मुंबई में पाव के नाम से जाना जाता है. फर्क यह है कि बन आकार में गोल होता है मगर पाव चौकोर टाइप होता है. इस पाव को यहां अलग अलग तरह से खाने में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें क्षितिज के समांतर चीरा लगा दिया जाता है और उसमें अलग अलग तरह की खाद्य सामाग्री चटनी और मसाले के साथ  स्टफ करने के आधार पर उसका वर्गीकरण किया जाता है. जैसे  पाव के अंदर वड़ा स्टफ करें तो वड़ा-पाव , उबला हुआ अंडा स्टफ करें तो अंडा-पाव , पकौड़ी स्टफ करें तो भजिया पाव , ऑमलेट स्टफ करें तो ऑमलेट पाव , यहां तक की समोसे को भी नहीं बख्शा जाता और समोसा भी स्टफ करके समोसा पाव बना दिया जाता है. इसके अलावा बिना स्टफ के साथ भी अलग अलग तरह के आइटम्स के साथ खाया जाता है.

 

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