गंभीर अड्डा

ओआरओपी से फिर बवाल, घिरी केंद्र सरकार

नवंबर 2, 2016 ओये बांगड़ू

जंतर-मंतर पर बेहद दर्दनाक घटना हुई जब एक रिटायर्ड सैनिक ने कथित तौर पर ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली. यहाँ इन्साफ के लिए उठने वाली आवाजों और धरने-प्रदर्शन पर पैनी नज़र रखने वाले राहुल मिश्रा ने इस मुद्दे पर अपने विचार ओए बांगड़ू के साथ शेयर किये है. आप भी पढ़िए

वन रैंक वन पैंशन के लिए एक पूर्व सैनिक द्वारा की गयी आत्महत्या के बाद आज दोबारा सेवानिवृत फौजियों का मुद्दा उछल गया है । मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सैनिक की आत्महत्या के लिए कौन ज़िम्मेदार है?

मैं इसे आत्महत्या नहीं कहूँगा! ये एक राजनैतिक हत्या है। जिसकी ज़िम्मेदार कहीं न कहीं हमारी व्यवस्था है। रेवाड़ी की रैली में लाखों की भीड़ के सामने पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पैंशन देने का वादा किया गया था लेकिन पूरा नहीं हुआ। हालांकि दावे तो ये भी किये गए कि वन रैंक वन पैंशन को लागू कर दिया गया है। लेकिन जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों की मानें तो वह सिर्फ एक लॉलीपॉप था। पेंशन को लागू तो किया गया लेकिन कई विसंगतियों के साथ।

वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रहीं हैं कि अगर ओआरओपी लागू कर दिया है तो एक पूर्व सैनिक आखिर आत्महत्या करने को मज़बूर क्यों हुआ? हमेशा सैनिकों के बारे में बोलने वाले प्रधानमंत्री मोदी भी चुप है ।

यहाँ तक कि आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक के परिजनों को आज हिरासत में ले लिया गया है! क्यों? क्या ये स्वतन्त्र लोकतंत्र की हत्या नहीं है?

पूर्व सैनिक के परिजनों से जब दिल्ली के मुख्यमंत्री सांत्वना व्यक्त करने जाते हैं तो उन्हें अस्पताल में प्रवेश ही नहीं करने दिया जाता, जबकि वो उस प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जहाँ पूर्व सैनिक ने आत्महत्या की। अगर दिल्ली पुलिस मुख्यमंत्री को आगे जाने से रोकती है तो किसके कहने पर ? जाहिर सी बात है केंद्रीय गृहमंत्री या गृहमंत्रालय के इशारे पर! आखिर राज्य पुलिस उसी के आदेश पर काम करती है।

क्या इसे लोकतंत्र का गला घोंटा जाना नहीं कहा जाएगा, जहाँ एक मुख्यमंत्री अपने नागरिकों से मिलने के लिए ढाई घण्टे तक इंतज़ार करता है!

क्या राहुल गांधी का एक दिन में 2 बार हिरासत में लिया जाना केंद्रीय राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े नहीं करता ? क्या सिर्फ उन्हें इसीलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उन्होंने पुलिस से सवाल किये कि शहीद के परिवार को हिरासत में लिए जाने का क्या कारण है?

विभिन्न न्यूज चैनल में चली फुटेज में पुलिस दुहाई दे रही है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और राहुल गांधी को  पीड़ित परिवार से इसलिए नहीं मिलने दिया गया क्योंकि वहां कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी। मैं और मेरे कई साथी पत्रकार वहां मौजूद थे जहाँ केजरीवाल को रोका गया, मनीष सिसोदिया व राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया। हमें तो उनके हाथ में ईंट पत्थर, गोला बारुद दिखाई नहीं दिया।

बहरहाल! बात यहाँ ख़त्म नहीं हुई! मुझे तो लगता है कि ख़त्म होनी भी नहीं चाहिए। मैं चाहता हूँ इसपर राजनीति हो, और जमकर राजनीति हो। आज़ाद भारत के लिए इस शर्मनाक दिन की कालिख को साफ़ करने के लिए राजनीति हो और सामने आए एक पूर्व सैनिक की आत्महत्या की वजह! वो वजह जिसने केंद्र सरकार के दावे की पोल खोल दी।

 

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