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अपनी भावनाओं को मीडिया के युद्ध में न बहने दें

फरवरी 27, 2019 कमल पंत

इस समय सोशल मीडिया और इन्डियन डिजिटल प्लेटफार्म्स पर सबसे ज्यादा फेक न्यूज फ़ैल रही हैं,पुलवामा अटैक के बाद हुई एयरफोर्स की जवाबी कार्रवाई के बाद से इण्डिया और पकिस्तान दोनों तरफ से बराबर फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं,दोनों तरफ की मीडिया इस माहौल से उपजे गुस्से को अपने व्यूवर्स,रीडर्स और व्यूज में बदलना चाहती हैं,इस टेंशन भरे माहौल में दोनों तरफ की मीडिया बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के एक दुसरे का हवाला देकर या अपुष्ट सूत्रों से खबर बनाकर अपने अपने प्लेटफार्म पर ब्रेकिंग के रूप में डाल रही हैं.

ध्यान रहे इस समय आप जो भी ख़बरें पढ़ रहे हैं वह बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के आप तक पहुंचाई जा रही हैं,आप एसे वख्त में क्या करें,एक रीडर व्यूवर या एक आम दर्शक/पाठक के रूप में आपको ये समझना थोड़ा मुश्किल होगा कि आप कैसे ख़बरें जज करेंगे कि कौन सी खबर आधिकारिक है और कौन सी फर्जी.

इसका बड़ा सरल सा तरीका है,फिलहाल आज के वख्त में,जब दोनों तरफ माहौल गर्म है  तो कारपरेट मीडिया सिर्फ सूत्रों के आधार पर खबर दे रहा है,और सिर्फ सूत्रों के माध्यम से आयी ख़बरों को इग्नोर कीजिये,क्योंकि इस समय बार्डर इलाकों में इन्टरनेट और मोबाईल कनेक्टिविटी लगभग बंद है,एसे में आप तक खबर पहुंचाने वाले सूत्र उड़ कर या कबूतर के माध्यम से खबर नहीं पहुंचा सकते,आप उन्ही ख़बरों पर भरोसा कीजिये जिनकी पुष्टि कोइ सरकारी अधिकारी या आर्मी आफिशियल कर रहे हैं,इन्डियन और पाकिस्तानी मीडिया दोनों इस समय सिर्फ सूत्रों के माध्यम से खबर लिखने/दिखाने में व्यस्त हैं. लेकिन आप एक आम दर्शक के रूप में सिर्फ उन ख़बरों पर यकीन करें जिनमे किसी सूत्र का जिक्र किया हो,जैसे किसी इन्डियन आर्मी के अधिकारी /प्रवक्ता का या किसी मंत्री के हवाले से खबर लिखी गयी हो,या किसी पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से खबर लिखी गयी हो.

अभी के माहौल में टीवी चैनल/डिजिटल प्लेटफार्म बिना किसी औथेन्टिक सोर्स के खबर परोस कर सिर्फ अपना व्यापार बढाने की फिराक में हैं,मुझे यह कहते हुए कोइ गुरेज नहीं कि युद्ध के इस माहौल में भी कार्परेट मीडीया हाउसेस सिर्फ अपना धंधा देख रहे हैं,भले ही वह पाकिस्तानी मीडिया हो या इन्डियन दोनों को बस खबर चाहिए वहां से जुडी हुई,भले ही खबर देने वाला कोइ भी हो,चाय वाला भी अगर बता दे कि कश्मीर में या पाकिस्तान में अभी दो मिनट पहले बम फूटा  तो शायद ये चैनल बिना किसी क्रास चेक के गैरजिम्मेदारी से यह लिखने में पीछे नहीं हटेंगे कि सूत्रों के अनुसार अभी अभी  वहां बम फूटा.

नियमानुसार आपको ख़बरों को क्रास चेक करना होता है,आप ब्रेकिंग की जल्दी में देश की भवानाएँ भडका रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे,युद्ध के माहौल में आपको तो लगातार ख़बरें मिल जायेंगी लेकिन असल में कितना बड़ा नुक्सान होगा यह दुनिया का हर वह देश जानता है जो युद्ध से गुजरा है.

हमने भी पहले युद्ध लड़े हैं और नुक्सान झेला है,लेकिन इस बार का युद्ध जवानों से ज्यादा मीडिया हाउसेस में लड़ा जा रहा है जिस तरह से खबर पर खबर बना कर सिर्फ बार्डर के बारे में लाईव अपडेट देने की होड़ लगी है,उससे जनता तो टीवी में चिपकी है मगर उसके अंदर तूफ़ान उठा है.दोनों तरफ इंडिया पाकिस्तान में इस तूफ़ान को भुनाने की कोशिश की जा रही है.

इस भावनाओं की लड़ाई को आखिर में जमीन पर जवानों ने ही लड़ना है,शहीद मीडिया हाउस के लोग नहीं बल्कि जवान होंगे,गोलियां दिल्ली के एसी रूम में बैठे मीडियाकर्मी नहीं बल्कि बार्डर पर लड़ाई लड़ रहे सैनिक खायेंगे,और उसके बाद मीडिया फिर उस इमोशनल माहौल को कैश करने की कोशिश में लग जाएगा,कार्परेट मीडिया के लिए तो ये एडवरटाइजमेंट पाने का अच्छा आफर है मगर आप याद रखियेगा कि आपको क्या मिल रहा है.

टीवी पर देख देख कर आप युद्ध के माहौल में मत ढलिये.ख़बरों के आधिकारिक सोर्स देखिये फिर यकीन कीजिये,आज तक खबर आपने जैसे भी देखी हो लेकिन आज जब खबर देखें तो ये चेक करना न भूलें कि टीवी या वेबसाईट किस सूत्र के आधार पर बात कर रहा है,देश के अंदर के आधिकारिक बयान,इन्डियन आर्मी,इन्डियन एयर फ़ोर्स,रक्षा मंत्रालय,पीएमओ,के हवाले से आयेंगी इसके अलावा जो भी खबर आप तक आ रही है उसे संदेह की नजर से देखें,दूरदर्शन देखने का सही वख्त यही है,आज बस दूरदर्शन में खबर देखिये.

 

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