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अमृतसर ट्रेन हादसा: मौत की ट्रेन ने ले ली 60 से ज्यादा लोगो की जान, गलती किसकी ?

अक्टूबर 20, 2018 ओये बांगड़ू

पंजाब के अमृतसर में दशहरा कुछ ही सेकंड में मातम में तब्दील हो गया. रावण दहन के दौरान जोड़ा फाटक पर ट्रेन आने से अनजान खड़ी भीड़ पठानकोट से अमृतसर आ रही  DMU जालंधर-अमृतसर एक्सप्रेस की चपेट में आ गयी. जिसमें 60 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी और न जाने कितने ही लोग घायल हो गये.  रेल की पटरी के नजदीक बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के किया गया यह आयोजन एक बड़ी लापरवाही था.

अक्सर लोग धर्मान्ध होकर अपनी सुरक्षा से खुद समझौता कर लेते है, कांवड़ हो गणेश चतुर्थी हो या कुछ और आपकी सुरक्षा के इंतजामों को आप खुद ही इग्नोर कर देते हैं, आपको लगता है कि पुलिस प्रशासन जो आपके लिए इंतजाम किए बैठा है वह बेवकूफ है. रेल की पटरी पर नॉर्मली जाने से बचते हैं, हमें मालूम है पटरी है तो रेल भी आएगी, लेकिन नही जब तक कोई कहे नही तब तक हटेंगे नही.

आप खुद बताइये पुलिस चालान न काटे तो हेलमेट पहनेंगे क्या?

अब आते हैं आयोजकों पर, राजनीति चमकाने और वोट पाने के लिए दशहरा को भुनाना उनका एकमात्र उद्देश्य था, रेलवे से बातचीत कर लेते, तो हो सकता है रेलवे उस ट्रेक की ट्रेन को लेट कर देता या कोई और इंतजाम किए जाते.

आपने माननीयों को तो अच्छे मंच पर बैठा दिया उनके आस पास पुलिस खड़ी करके भीड़ पीछे खदेड़ दी, पीछे कहाँ? रेलवे ट्रेक पर.

दशहरे के उत्साह में आदमी नही देख पाया कि वह कहां खड़ा है. आस पास घुप अंधेरा, जाहिर है उसे ट्रेक का ध्यान नही रहा हो. उस समय चालान काटने वालें पुलिस वालों की तरह कुछ पुलिस वाले तत्परता से लोगों को ट्रैक से हटाते तो हो सकता है हादसा टाला जा सकता था.

आपने दीवार में कंटीली तार डालकर ये तो कह दिया कि दोनों चीजें एक दूसरे से अलग हैं. लेकिन ज्यादा भीड़ होगी तो दीवार फांदी जाएगी. दीवार के पार रेलवे ट्रेक पर के इंतजाम एक तरह से कुछ थे ही नही.

बड़ी सामान्य सी बात है कि रेलवे पटरी और छोटे से ग्राउंड जब आस पास हो तो बड़े बड़े रावण मेघनाद का क्या लॉजिक है?

हमारे यहां मेघनाद रावण के पुतले की ऊँचाई क्या कोई पावर दिखाने के लिए बनाई जाती है। 50 फुट के जगह अगर 20- 30 फुट का रावण होता तो क्या आयोजकों का मान घट जाता ?

प्रशासन ने रेलवे से सटे ग्राउंड में 50 फूट का रावण तो खड़ा कर दिया, लेकिन उसे देखने के लिए 50 फुट की सुरक्षित जगह तक का इंतजाम नही किया. रेलवे ने भी इस आयोजन की जानकारी से अनजान होने की बात कहते हुए पला झाड लिया.

ये उत्सव शांति से हो जाता तो यही आयोजक इस रावण के नाम पर वोट मांग रहे होते, कि कैसे उन्होंने 50 फुट का रावण बनाकर जलाया,यह  एक उपपब्धि होती. उसके वोट मांगे जाते, हर साल दशहरा में ऐसा ही रावण बनाने का प्रॉमिस किया जाता.लेकिन अब आयोजक बचते फिर रहे हैं. इस हादसे के लिए वहां पहुंची चीफ गेस्ट नवजोत कौन सिद्धू को भी जिम्मेदत ठहराया जा रहा है जो तय समय से काफी देरी से पहुंची. हालांकि नवजोत कौर रेलवे प्रशासन को इस हादसे का जिम्मेदार ठहरा रही है. राजनेता आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं. नेता वहां मिलने आ रहे हैं और कह रहे हैं, फलाना जगह का प्रोग्राम छोड़ कर आये. विदेश यात्रा से आये वगेरह वगेरह.

ये हमारे नेताओं की संवेदनहीनता ही है कि वह अब भी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने में लगे हैं.

अमृतसर में रेलवे के हेल्पलाइन नंबर:

0183-2223171

0183-2564485

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