गंभीर अड्डा

महाराष्ट्र में लागू मगर केरला में भागू क्यों ?

अक्टूबर 28, 2018 ओये बांगड़ू

अमित शाह ने केरला के सबरीमाला वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट को कहा कि सर जी ,ऐसे फैसले दो जो लागू किये जा सकें। केरला में वैसे भाजपा की कोई खास पकड़ नहीं  है। केरला में कोई और ही सरकार है। अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है तो इम्प्लीमेंट तो होगा ही।  लेकिन पहले जरा हम आपको पास्ट में ले चलते हैं .

हुआ कुछ यूं कि अहमदनगर के शनि मंदिर (शिंगणापुर) और कोल्हापुर का लक्ष्मी मंदिर इन दोनों जगह भी ऐसे ही एंट्री पर बैन था। मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ने कहा भारत आजाद है, हर नागरिक के अपने अधिकार हैं उनका हनन नही होना चाहिए। इसलिए घुसो।

जगह थी महाराष्ट्र और सरकार थी फणनवीस की, यानि भाजपा की, तो बस कोर्ट का आदेश सर आंखों पर। विरोध करने वालों को दिया डंडा और दोनो मंदिरों में बिंदास कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन करवा दिया गया।

जो विरोध करता है वह जाए तेल लेने।

दूसरा मंदिर केरला का सबरीमाला, मामल वही कोर्ट में, कोर्ट से वही सेम टू सेम फैसला। बस इम्प्लीमेंट होना रह गया था। वहां की लेफ्ट सरकार इम्प्लीमेंट करवा ही रही थी कि दबा कर विरोध चालू।

तभी प्रकट हुए मोटा भाई। कुछ लोग इन्हें चाणक्य भी कहते हैं। असली नाम अमित शाह है, गुजरात से तड़ीपार हो चुके हैं।

मोटा भाई का एक ही उसूल है, जीतना।

न केन प्रकारेण बस जीत आखिरी मंजिल होनी चाहिए। कई राज्यों में इनके रणनीतियों की तूती बोलती है। रणनीति क्या है  आप समझ ही रहे हों। दूसरी पार्टियों के पॉपुलर लोगों को अपनी पार्टी में बुला लो। कि फरक पैंदा है। बस जीत जरूरी है।

तो इन्होंने केरला में पैसा फेंकना चालू कर दिया। केरला में आपने आये दिन दक्षिणपन्थ और वामपंथ के टकराव की खबर सुनी होगी । हल्के शब्दों में कहूँ तो संघ और लेफ्ट वाले एक दूसरे को यहां मारते रहते हैं। कॉमन है एकदम। तो इसी केरला में प्रकट हुए मोटा भाई.

आते ही बोल दिया कि देखो भई कोर्ट जी, ऐसे फैसले दो जो लागू किये जा सकें। शायद महाराष्ट्र  दिमाग से स्किप हो गया होगा। हो जाता है। भूलना कौन सी बड़ी बात होती है। जुमले कहकर बड़ी बड़ी बातें भुला दी जाती हैं।

तो मोटा भाई ने खुले रूप से कोर्ट के अगेंस्ट जाने वालों के समर्थन में अपना बयान दे दिया। आधे से ज्यादा वोटर (आदमी या इंसान नही) इस बयान से सीधे मोटा भाई की गोदी में। क्यों, है न भयंकर चाल। अरे कोई नेता ऐसे खुलकर कंटेम्प्ट ऑफ  कोर्ट करे, हमारे लिए तो उसे तो वोट देना बनता है। वैसे कोर्ट तो आब्जेक्शन कहने पर भी आम आदमी पर कंटेंप्ट ऑफ़ कोर्ट लगा देती है। देखते हैं मोटा भाई पर कब लगता है?

वैसे कहानी का एन्ड ये है कि मोटा भाई ने केरला का वोट बैंक फिलहाल अपने कब्जे में कर लिया है । बाकी एक आद कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट लग भी जाते हैं तो क्या बुराई है।

वाह रे दुनिया! एक जैसे केस एक जैसे मामले और फैसला भी एक जैसा मगर सरकारों में अंतर के कारण लागू अलग अलग तरीकों से होगा।

जय हिंद जय भारत

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