यंगिस्तान

आमा फसक

मई 6, 2018 Girish Lohni

आमा एक फोटू लैह लू आपका?
रुक नाती पैल्ली बोट हैं उतरू फिर खिचलै.(बेटा पेड़ से उतरने दे फिर खैचले)
नि आमा ऐसे ही पेड़ की डाली काटते हुए।
नैंं-नैं बिलकुल नैं..
ठीक है. निचे आकर तो खिंचा लो।
(फोटो के बाद)
आमा एक बात तो बताओ आपने काम करते हुए क्यों नि खिचने दी
बदनाम है जांछ चेला. पैल्ली साल एक रनकारले मल्ली मांंग में संतोषक इजाक खोटू खिंच बेर पत्तने क्या इटरफैट-निटरफैट कूनि उमी में हाल दि फिर ज दैखने जस तमास भिच उयिक घर ( पिछले साल किसी लड़के ने संतोष की मां कि फोटो लि फिर उसके घर जो तमासा हुआ क्या बताउं)
मतलब
अरे उयिक च्याल ब्वारी रूनि मुंबई खूब प्यार करनान बल पहाड़ेल.. वां ठुल-ठुल कार्यक्रम रे करनी बल.. पलायन पर यसि बात करनान कि सपैं रूआंसी है जानान ( अरे उसके बेटे बहु मुम्बई में रहते हैं पहाड़ से खूब प्यार करते हैं.. वहां बड़े बड़े कार्यक्रम भी करते हैं.. पलायन पर ऐसी बात करते हैं कि हर कोई रुआंसा हो जाये )
तो?
तो तेर खोर.. ऊदू ठुल आदिमक बुढि ईजा पहाड़ में बोटान में चड़न मरे शरमक बात नै भे.. सिबौ जस नड़काय न संतोसेल अफुन ईजास.. ( तो तेरा सिर.. उतने बड़े आदमी की बुढ़ी मां अगर पहाड़ के पेड़ो में चड़ेगी तो शर्म की बात नहीं हुई.. बड़े बुरे तरीके से अपनी ईजा का डांटा संतोष ने)

हम्म।

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