बांगड़ूनामा

आरक्षण वाली शोले

नवंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू

वीरू – ये दोस्ती हम नही तोडेंगे !

जय –भक्क दलित कहीं के!

 

जय – मौसी बसंती को बोल हाँ कर दे वर्ना कुद जाऊँगा फान जाऊँगा !

मौसी – अच्छा! एक बात बता तू कवन जात है ?

जय – जात पूछती है माधरजात ! बसंती की माँ की आँख!

 

ग़ब्बर -अरे ! ओ साम्भा  कितने आदमी थे रे ?

कालिया – सरदार अनपढ़ हूँ गिन नही सका पर बहुत थे !

 

ग़ब्बर – तो तुम दो थे  ना कुछ किये नही का ?

कालिया -सरदार किये न बहुत कुछ किये कई जगह तोड़ फोड़ की आग लगाये , एम्बुलेंस रोक दी ..एक ठुल्ले को जान से मार दिया !

ग़ब्बर – शाबाश् ! ये हुई ना बात किसी ने तुम्हारे खिलाफ आवाज तो नही उठायी?

कालिया – नहीं सरदार! बिलकुल भी नही वो जुमलेबाज भी कुछ नही बोला ना ही किसी ने कड़ी निन्दा की !

 

जय – देख बसंती तू काहे उस वीरू दलित के पीछे मर रही है

मेरी हो जाओ  हम ऊँचे पगड़ी और बड़े ही ठाट-बाट वाले है !

बसंती – तो क्या हुआ तुम्हे 1% भी आरक्षण नही मिलता

उपर से तुम्हारे पास तो जाति का प्रमाण पत्र भी नही है !

 

जय  – तो क्या हुआ मेरे पास बंगला है ,गाड़ी है, मौसी भी है !

बसंती -वीरू के पास आधार कार्ड है , जो तुम्हारे पास नही है !

वीरू – कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊँगा!

जय – पी ले 70 साल तो हम ने पिया है अब तेरी बारी है ,

पर बसंती मेरी है !

वीरू- जा ले जा ! इसने पैन को बैंक खाते से नही जुड़वाया गंवार कही की !

 

ग़ब्बर – अरे ओ सांभा इस ठाकुर का क्या किया जाये ?

कालिया – सरदार इसके हाथ काट दो !

ग़ब्बर -ये हाथ हमको दे दे ठाकुर ?

ठाकुर -लेले साले! जल्दी से काट क्योंकी अब मैं भी  इन हाथों से गटर नाली टट्टी साफ करते करते थक चुका हूँ  !

ग़ब्बर – अरे भाई भाई भाई, अब रूलायेगा क्या पगले ?

 

ठाकुर – तेरा भी कटा है लगता है !

ग़ब्बर – हाँ वो बसंती काट गई है सांभा उठा लाना तो ज़रा  उस बसंतिया को !

सांभा – जो हूक्म सरदार !

कालिया – अबे  चल  ! दो टके की लौण्डिया …

 

बसंती – दारोगा जी बचाओ! बचाओ !

दारोगा- माफ करो कानून के हाथ लंबे होते है मजबूत नही,

और सुनी नही का कानून अंधा भी होता है !

 

बसंती – समझ गई| सब के सब मिले हुए हो, ये गवरमिंट भी बिक गई है !

ग़ब्बर – नाच बसंती नाच जब तक तू नाचेगी तब तक जय- वीरू की सांस चलेगी!

सांभा – अरे ! सरदार ई ईहा कईसे नाचेगी हम लोग दलित समुदाय  के  है ना !

ग़ब्बर – हाये मोरे करम ! बात तो तूने सही कही और नाहीं मैने अपने लिंग को आधार से लिंक करवाया है की इसकी इज्ज़त लूट सकूँ!

 

जाओ रे बोल दो रामगढ़ से बोल दो की 31 मार्च तक तक जाति कार्ड ,पैन कार्ड , आधार कार्ड सब बनवा ले वर्ना जीने नहीं देगा

वो किसी को देश में …!

 

  • लेखक -राजीव कुमार (मीडिया स्टूडेंट)

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