यंगिस्तान

आमजन को भगवान दिखाने वाला चित्रकार

अप्रैल 29, 2017 ओये बांगड़ू

एक बड़े जबर्दस्त कलाकार होते थे, नाम था राजा रवि वर्मा, केतन मेहता साहब की एक फिल्म रंगरसिया के जरिये बहुत से लोगों ने राजा रवि वर्मा को जाना होगा. एक चित्रकार कलाकर और सबसे बड़ी बात भगवान को इंसान से मिलाने वाले माध्यम , जी ये सबसे सही सम्बोधन होगा उनके लिए. उस समय पैदा हुए थे जब मंदिरों के अलावा भगवान कहीं और नहीं पाए जाते थे. भगवानों की कोइ भी तस्वीर बाहर लाना पंडितों ने पाप समान घोषित किया हुआ था. दलित मन्दिर में जा नहीं सकते और भगवान बाहर आ नहीं सकते एसे में आम जन भगवान को देखे तो कैसे देखे. 

कई तो एसे भी लोग जन्मे जो बिना भगवान के दर्शन के ही मर गए. उन्हें पता ही नहीं चल पाया कि आखिर भगवान होते हैं तो होते कैसे हैं. मंदिरों में ब्राह्मणों का वर्चस्व और वो राजा के अलावा किसी और को मंदिर में घुसने ना दें. राजा रवि वर्मा बस उसी दौर की पैदाईश रहे. आज ही के दिन 29 अप्रैल को पैदा हुए थे सन था 1848 केरल के एक छोटे से शहर किलिमानूर में पैदा हुए . पाँच वर्ष की छोटी सी आयु में ही उन्होंने अपने घर की दीवारों को दैनिक जीवन की घटनाओं से चित्रित करना प्रारम्भ कर दिया था. उनके चाचा कलाकार राजा राजा वर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और कला की प्रारम्भिक शिक्षा दी. चौदह वर्ष की आयु में वे उन्हें तिरुवनंतपुरम ले गये जहाँ राजमहल में उनकी तैल चित्रण की शिक्षा हुई. बाद में चित्रकला के विभिन्न आयामों में दक्षता के लिये उन्होंने मैसूर, बड़ौदा और देश के अन्य भागों की यात्रा की. राजा रवि वर्मा की सफलता का श्रेय उनकी सुव्यवस्थित कला शिक्षा को जाता है. उन्होंने पहले पारम्परिक तंजौर कला में महारत प्राप्त की और फिर यूरोपीय कला का अध्ययन किया.

तो राजा रवि वर्मा साहब ने भगवानों की तस्वीरों को सर्व सुलभ कर दिया. उन्होंने जनता के बेच मंदिर के भगवानों को उतार दिया. ब्राह्मण उनकी हरकत से तिलमिला गए थे. लेकिन एक मस्त कलाकार को इन बातों से क्या फर्क पड़ता. वो अपना काम करते रहे. बाद में प्रिंटिंग प्रेस भी डाल दी और किसी अंग्रेज के साथ सेटिंग करके दबाकर हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरों को बाजार में उतारा. एक बढिया बिजनेसमैन की तरह काम किया. नोट छापे. समाज में उन लोगों को भगवान दिखाए जो भगवान के चित्र की बस कल्पना करते थे.साथ के साथ उन्हें भगवान दिखाने के पैसे भी ले लिए भगवान की फोटो बेचकर.

ये जो आजकल विष्णु शिव राम सीता की आप तस्वीर देखते हैं , प्रोफाईल डीपी ये सब इन्ही राजा रवि वर्मा की बनाई हैं. इन्ही के दिमाग की खेड थी जो विष्णु भगवान को समुद्र में सांप पर लेटा दिखा दिया. अपने भ्रमण काल में इन्होने जिसके मुंह से भगवानों की जैसी कहानी सूनी उसे वैसा ही आकार दे दिया. गले में सांप डाले , हाथ में त्रिशूल माथे में चन्द्रमा वाले शंकर की कल्पना भी एसी ही किसी कहानी से आयी और इन्होने उसे चित्रित कर डाला.

खैर बाद में राजा रवि वर्मा की बहुत आलोचना हुई, खासकर तब जब लोगों को पता चला कि इन्होने जो देवी के चित्र बनाएं हैं वो दरअसल देवी नहीं ,समाज की पिछड़ी लड़की है. 1906 में इनके डेथ भी हो गयी . बस फिलहाल के लिए इतना ज्ञान काफी है.

 

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