बांगड़ूनामा

एक कहानी- देवता लग जाना

नवंबर 23, 2018 ओये बांगड़ू

पहाड़ में एक प्रथा है । किसी को देवता “लग” जाता है और वह निदान के लिए ‘पुछ्यारे’ /’वाक्किये’ के पास जाता है। दोनों में संवाद कुछ इस तरह होता है :

* हे परमेश्वर,भला कर. संकट दूर कर दे

-देख तू ने पिछली बार झूठ बोला , बोल बोला कि नहीं

*अनजाने हुआ होगा इष्ट ज्यू

– नहीं, तूने कहा मंदिर बनाऊंगा नहीं बनाया। इसलिए भोगना पड़ेगा अपने करमों का फल।

* हे परमेश्वर अबकी बार गद्दी दिला दे तो मैं जरूर बनाऊंगा तेरा बड़ा मंदिर, ऊँची मूर्ति।

– तूने धोखा दिया है । ऐसे ही नहीं मानेगा देवता ।

* नहीं मैं वचन देता हूं अब चूक नहीं होगी,

– तो वचन के साथ बलि भी देनी पड़ेगी…

* उसके लिए तो मेरे लोग सदा हाजिर ठैरे

 -अच्छा,अगर मंदिर नहीं बना तो फिर समझ लेना खैर नहीं

* परमेश्वर,अबकी बार जरूर बनेगा

– अच्छा जा सोचता हूं। अभी मेरे थान पर कुछ भेंट रख दे। बाहर चेलों का गला तर कर। मुँह बंद करने का इंतजाम कर। मैं देखता हूँ.

 

(लेखक-सुरेश पन्त)

 

 

 

 

 

 

 

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